Saturday, November 19, 2011

ग़ज़ल (बात रब की मान)

गूगल से साभार
मांग मत आराम के दो पल ।
और बन सूरज दमकता चल ।1

आप अपनी ताकतें पहचां, 
कौन फिर तुझको सकेगा छल ।2

किस वजह बैठा झुकाये सिर,
चाँद पर भी जीत तो हासल ।3

गीत खिल के जगमगायेंगे,
बात रब की मान रब में ढल ।4

कौन जग में है पराया कह,
दीप बन के राह में तू जल ।5

हौसला कर बढ़ बना ले तू,
सफलता को आँख का काजल ।6

पाँव पर अप ने भरोसा कर,
नाप सकता तू गगन का बल ।7

तू फ़साना गढ 'हबीब' अलग,
याद तुझको तब रखेगा कल ।8

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30 comments:

  1. बात रब की मान रब में ढल ।4।
    वाह! प्रार्थना सी पावन गज़ल!
    प्रेरक प्रस्तुति!

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  2. बहुत सुंदर ...अपने ऊपर हौसला हो तो उससे अच्छा कुछ नहीं...प्रेरणास्पद कविता.
    पहचान.ठीक कर दीजिये ..हासल भी .
    हासिल होना चाहिए न .... ?

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  3. पाँव पर अप ने भरोसा कर,
    नाप सकता तू गगन का बल

    बहुत ही शानदार ,बहुत सुन्दर

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  4. पाँव पर अप ने भरोसा कर,
    नाप सकता तू गगन का बल
    हौसला बढाती हुई ग़ज़ल मुबारक हो

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  5. तू फ़साना गढ 'हबीब' अलग,
    याद तुझको तब रखेगा कल

    वाह हबीब भाई.
    बहुत खूब.
    छोटी बहर.लेकिन बात बड़ी.

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  6. आप अपनी ताकतें पहचां,
    कौन फिर तुझको सकेगा छल ।2।

    कौन जग में है पराया कह,
    दीप बन के राह में तू जल ।5।


    पाँव पर अप ने भरोसा कर,
    नाप सकता तू गगन का बल ।7।

    पुरी गज़ल ही बेहद खूबसूरत ... प्रेरणादायक रचना बहुत अच्छी लगी

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  7. पाँव पर अप ने भरोसा कर,
    नाप सकता तू गगन का बल
    जब हो हौसला हो तो आसमां भी झुक कर पांवों में आ जाता है।

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  8. पाँव पर अप ने भरोसा कर,
    नाप सकता तू गगन का बल ।7।
    waah, her shabd hausla dete hain

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  9. हौसला कर बढ़ बना ले तू,
    सफलता को आँख का काजल ।6।

    पाँव पर अप ने भरोसा कर,
    नाप सकता तू गगन का बल ।7।

    कितनी सकारात्मक और प्रोत्साहन देती पंक्तियाँ रची है ..... बहुत सुंदर

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  10. हौसला कर बढ़ बना ले तू,
    सफलता को आँख का काजल
    पाँव पर अप ने भरोसा कर,
    नाप सकता तू गगन का बल ।
    बेहद ख़ूबसूरत और हौसला बढ़ाती हुई हर शब्द आपने बड़े ही शानदार रूप से लिखा है! इस उम्दा और प्रेरणादायक ग़ज़ल के लिए बधाई!
    मेरे नये पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

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  11. बढ़िया लिखा है.

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  12. आशा और जोश भरती ये पोस्ट बेहतरीन लगी|

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  13. हौसला कर बढ़ बना ले तू,
    सफलता को आँख का काजल

    behtareen sher...umda gazal

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  14. बहुत सुन्दर ..लिखा है हबीब जी... हौंसला भरती रचना ..उम्दा

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  15. कौन जग में है पराया कह,
    दीप बन के राह में तू जल ।5।

    बहुत सुन्दर और प्रेरक अभिव्यक्ति..

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  16. अद्भुत रचना...बधाई

    नीरज

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  17. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी की जा रही है!
    आपके ब्लॉग पर अधिक से अधिक पाठक पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  18. उत्साह से ओत-प्रोत सुंदर प्रस्तुति

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  19. हौसला कर बढ़ बना ले तू,
    सफलता को आँख का काजल ...

    बहुत खूब संजय जी ... लाजवाब गज़ल का खूबसूरत शेर है ये ...

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  20. वीर भाव कई समस्याओं का समाधान तो है।

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  21. गीत खिल के जगमगायेंगे,
    बात रब की मान रब में ढल

    bahut khub ..har sher lajwaab laga shukriya

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  22. हौसला कर बढ़ बना ले तू,
    सफलता को आँख का काजल

    बहुत बढ़िया

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  23. तू फ़साना गढ 'हबीब' अलग,
    याद तुझको तब रखेगा कल ।
    एक-एक पंक्ति प्रेरणादायी.............

    तन सजाने से मिलेगा क्या ?
    तू हमेशा मन को रख उज्जवल.
    साध लेना , साधना से तू
    कह गये सब ,मन बड़ा चंचल.

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  24. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल आज 24-- 11 - 2011 को यहाँ भी है

    ...नयी पुरानी हलचल में आज ..बिहारी समझ बैठा है क्या ?

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  25. jivan to chalata rahata hai.isliye jivan ke sath hame bhi nirantar aage badhate jana chahiye...
    acchi sikh deti rachana
    sundar prastuti hai...

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मेरी हौसला-अफजाई करने का बहुत शुक्रिया.... आपकी बेशकीमती रायें मुझे मेरी कमजोरियों से वाकिफ करा, मुझे उनसे दूर ले जाने का जरिया बने, इन्हीं तमन्नाओं के साथ..... आपका हबीब.

"अपनी भाषा, हिंदी भाषा" (हिंदी में लिखें)

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