Tuesday, May 15, 2012

संग तुम अविराम हो

सभी सम्माननीय स्नेही स्वजनों को सादर नमन. आदरणीय मित्रों आप सब की सहृदय संवेदनाओं ने कठिन समय में बड़ा संबल प्रदान किया. आप सभी को मैं ह्रदय से नमन करता हूँ. १३ मई "मदर्स डे" पर कुछ पंक्तियाँ रची थी, पर पता नहीं कुछ तकनीक की समस्या थी या कुछ और मैं रचना पोस्ट (पब्लिश) करने में सफल नहीं हो पा रहा था... आज मेरे मित्र और नेटवर्क मेनेजर द्वारा किये गए सुधार कार्य के पश्चात "माँ" को स्मरण और नमन करते वही रचना सुधि जनों की सभा में सादर प्रस्तुत करता हूँ.... 
  
माँ दहकती धूप में तुम छांव हो तुम शाम हो। 
स्वेद से जब मन भरा हो, सांस हो, आराम हो। 

दीप आशा हो तुम्हीं, तुम आरती हो श्लोक भी,
जब जुबां खोली, निकलता, एक पावन नाम हो। 

सत्य की ज्योति सदा अँधियार से लड़ती हुई, 
मुश्किलों को थाम ले जो, वह लहर उद्दाम हो।

तुम यशोदा, देवकी तुम, कृष्ण भी तुम राधिका,
छंद तुलसी का मधुर, तुम जानकी तुम राम हो। 

बाग हो, अक्षय खजाना खुशबुओं की भीनी सी,
देव सब बसते जहां, तुम वो ही अमृत धाम हो। 

तज धरा को जा चुकीं पर सर्वदा मुझको लगे, 
पेड़, छैया, नद, पवन बन संग तुम अविराम हो।

साथ संजय को रखो माँ थाम अंगुली उम्र भर, 
आस तुम, विश्वास तुम, विश्रांति में विश्राम हो।

*********************************************************************
दुनिया के समस्त माओं हेतु दीर्घ और स्वस्थ्य जीवन की प्रार्थना सहित सादर नमन
*********************************************************************

 

52 comments:

  1. दीप आशा हो तुम्हीं, तुम आरती हो श्लोक भी,
    जब जुबां खोली, निकलता, एक पावन नाम हो।

    बहुत गहन मर्मस्पर्शी भाव ....
    माँ को नमन ....!!

    ReplyDelete
  2. औलाद के दुःख-दर्द, बाँटने के वास्ते
    माँ हर-दम हर-घड़ी, तैयार है, होती
    एहसास करो, ज़रा उनके दुखों का
    जिन बदनसीबों की, माँ नही होती

    माँ को नमन .......

    ReplyDelete
  3. बहुत सुंदर संजय जी.................
    दिल भर आया इसको पढ़ कर...
    बार बार पढ़ने को जी चाहता है.

    तज धरा को जा चुकीं पर सर्वदा मुझको लगे,
    पेड़, छैया, नद, पवन बन संग तुम अविराम हो।

    वही एक साया है जो अन्धकार में भी साथ नहीं छोड़ता.....

    सादर.

    ReplyDelete
  4. त्वरित टिप्पणी से सजा, मित्रों चर्चा-मंच |
    छल-छंदी रविकर करे, फिर से नया प्रपंच ||

    बुधवारीय चर्चा-मंच
    charchamanch.blogspot.in

    ReplyDelete
  5. दीप आशा हो तुम्हीं, तुम आरती हो श्लोक भी,
    जब जुबां खोली, निकलता, एक पावन नाम हो।

    ....बहुत पावन भाव...माँ को नमन

    ReplyDelete
  6. फिर एक और मार्मिक कविता के लिए बधाई...

    ReplyDelete
  7. माँ दहकती धूप में तुम छांव हो तुम शाम हो।
    स्वेद से जब मन भरा हो, सांस हो, आराम हो।

    दीप आशा हो तुम्हीं, तुम आरती हो श्लोक भी,
    जब जुबां खोली, निकलता, एक पावन नाम हो.... पावनता के साथ माँ को याद किया है

    ReplyDelete
  8. संजय जी बेहद खूबसूरत रचना...

    ReplyDelete
  9. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...

    ReplyDelete
  10. है सभी कुछ पास बस,तुम एक संग मेरे नहीं
    हूं ढूंढता ये जानता, लौटा नहीं कोई कभी!

    ReplyDelete
  11. माँ को समर्पित यह रचना बहुत सुंदर है ...

    ReplyDelete
  12. बाग हो, अक्षय खजाना खुशबुओं की भीनी सी,
    देव सब बसते जहां, तुम वो ही अमृत धाम हो।

    माँ को सादर नमन.

    ReplyDelete
  13. तज धरा को जा चुकीं पर सर्वदा मुझको लगे,
    पेड़, छैया, नद, पवन बन संग तुम अविराम हो।
    माँ की याद में बहुत सुन्दर इस अप्रतिम रचना के लिए बधाई

    ReplyDelete
  14. मां पर जब भी पढ़ा है मन भावुक हो गया ... बहुत ही अच्‍छा लिखा है आभार ।

    ReplyDelete
  15. दीप आशा हो तुम्हीं, तुम आरती हो श्लोक भी,
    जब जुबां खोली, निकलता, एक पावन नाम हो। ...

    मन में सीधे उतर गए ये अलफ़ाज़ ... बहुत ही कोमल एहसास और माँ के प्रेम की पूरी पूरी झलक देती रचना .... लाजवाब ...

    ReplyDelete
  16. तज धरा को जा चुकीं पर सर्वदा मुझको लगे,
    पेड़, छैया, नद, पवन बन संग तुम अविराम हो।
    माँ को सादर नमन... माँ भी हमेशा आसपास रहेगी दूर कैसे जा सकती है अपने कलेजे के टुकड़े से

    ReplyDelete
  17. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
  18. साथ संजय को रखो माँ थाम अंगुली उम्र भर,
    आस तुम, विश्वास तुम, विश्रांति में विश्राम हो।

    बहुत सुंदर मन को भावुक करती रचना,..अच्छी प्रस्तुति.....

    बहुत सुंदर रचना,..अच्छी प्रस्तुति

    MY RECENT POST काव्यान्जलि ...: बेटी,,,,,

    ReplyDelete
  19. आपके प्रार्थना में हम भी सहभागी हैं...

    ReplyDelete
  20. तज धरा को जा चुकीं पर सर्वदा मुझको लगे,
    पेड़, छैया, नद, पवन बन संग तुम अविराम हो।
    अति उत्कृष्ट रचना बधाई स्वीकार करें .माँ दिवस की .

    ReplyDelete
  21. मदर्स डे पर मेरे द्वारा पढ़ी गई अब तक सर्व श्रेष्ठ रचना भाव अर्थ और प्रतीक विधान सभी विषयानुकूल .,विषयानुरूप .

    ReplyDelete
  22. माँ शब्दों में कहाँ समाये,
    जितना बाँधू, बढ़ता जाये।

    ReplyDelete
  23. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 17 -05-2012 को यहाँ भी है

    .... आज की नयी पुरानी हलचल में ....ज़िंदगी मासूम ही सही .

    ReplyDelete
  24. मां को समर्पित यह काव्य रचना हिन्दी साहित्य को अनुपम उपहार है। जिस भाव से यह कविता लिखी गई है वह मन ही नहीं दिल को भी स्पर्श करती है।

    ReplyDelete
  25. आस तुम, विश्वास तुम, विश्रांति में विश्राम हो!!
    माँ का स्नेह अतुलनीय है.. बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति है, शब्द-शब्द जैसे नमन कर रहे हों माँ को!
    सादर
    मधुरेश

    ReplyDelete
  26. बहुत सुंदर, मां के प्रति श्रद्धा और प्रेम से भरपूर कविता..

    ReplyDelete
  27. माँ दहकती धूप में तुम छांव हो तुम शाम हो।
    स्वेद से जब मन भरा हो, सांस हो, आराम हो। .....
    मां के प्रति श्रद्धा और प्रेम से भरपूर कविता..बहुत सुन्दर....

    ReplyDelete
  28. माँ तुझे सलाम!!!माँ को समर्पित...मर्मस्पर्शी,सुन्दर रचना

    ReplyDelete
  29. तज धरा को जा चुकीं पर सर्वदा मुझको लगे,
    पेड़, छैया, नद, पवन बन संग तुम अविराम हो।

    साथ संजय को रखो माँ थाम अंगुली उम्र भर,
    आस तुम, विश्वास तुम, विश्रांति में विश्राम हो।

    bahut hi sundar prastuti Mishr ji badhai sweekaren

    ReplyDelete
  30. बहुत प्यारा सम्मोहन अनुराग माँ के प्रति ओ रोम रोम में बसने वाले राम ....
    तुम यशोदा, देवकी तुम, कृष्ण भी तुम राधिका,
    छंद तुलसी का मधुर, तुम जानकी तुम राम हो।

    ReplyDelete
  31. ram ram bhai
    कृपया यहाँ भी पधारें .
    http://veerubhai1947.blogspot.in/

    शुक्रवार, 18 मई 2012
    नुस्खे सेहत के /दिमाग के सीखने की क्षमता को कुंद कर सकता हैं शक्कर से लदी चीज़ों का अधिक सेवन

    ReplyDelete
  32. साथ संजय को रखो माँ थाम अंगुली उम्र भर,
    आस तुम, विश्वास तुम, विश्रांति में विश्राम हो।

    दीप आशा हो तुम्हीं, तुम आरती हो श्लोक भी,
    जब जुबां खोली, निकलता, एक पावन नाम हो।
    beautiful lines

    ReplyDelete
  33. बहुत ही खुबसूरत
    और कोमल भावो की अभिवयक्ति......

    ReplyDelete
  34. Good bikes shops in london
    Excellent Working Dear Friend Nice Information Share all over the world.God Bless You.
    used bicycles london

    ReplyDelete
  35. Good bikes shops in london
    Excellent Working Dear Friend Nice Information Share all over the world.God Bless You.
    used bicycles london
    used cycles london uk

    ReplyDelete
  36. तज धरा को जा चुकीं पर सर्वदा मुझको लगे,
    पेड़, छैया, नद, पवन बन संग तुम अविराम हो।
    माँ तुझे सलाम...बहुत सुन्दर

    ReplyDelete
  37. बहुत सुन्दर शब्दों में ये पोस्ट लिखी है आपने।

    ReplyDelete
  38. स्वानुभूति से सहज निसृत ये रचना साधारणीकरण कराने में सर्वथा सक्षम है .लिखा आपने है अनुभूत हमने भी किया .शुक्रिया इतनी खूबसूरत रचना के लिए .माँ का व्यक्ति चित्र है आखिर .
    कृपया यहाँ भी पधारें -
    सोमवार, 21 मई 2012
    यह बोम्बे मेरी जान (चौथा भाग )
    http://veerubhai1947.blogspot.in/
    तेरी आँखों की रिचाओं को पढ़ा है -
    उसने ,
    यकीन कर ,न कर .

    ReplyDelete
  39. माँ बस माँ है .

    ReplyDelete
  40. दीप आशा हो तुम्हीं, तुम आरती हो श्लोक भी,
    जब जुबां खोली, निकलता, एक पावन नाम हो।

    मां की ममता और महानता का गुणगान करती बहुत सुंदर रचना।
    मातृशक्ति को नमन !

    ReplyDelete
  41. बहुत ही प्रभावित करती पक्तियां । मेरे नए पोस्ट अमीर खुसरो पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

    ReplyDelete
  42. बहुत ही बेहतरीन रचना....
    मेरे ब्लॉग

    विचार बोध
    पर आपका हार्दिक स्वागत है।

    ReplyDelete
  43. सांध्य कालीन प्रार्थना ,वेद की रिचाओं सा सम्मोहन लिए है यह कविता .

    ReplyDelete
  44. उम्दा, बेहतरीन अभिव्यक्ति...बहुत बहुत बधाई...

    ReplyDelete
  45. हृदयस्पर्शी रचना। माँ जैसा कोई नहीं!

    ReplyDelete
  46. कोमल भाव से सजी बहुत ही सुन्दर भावपूर्ण रचना,,,,

    ReplyDelete
  47. बहुत उत्कृष्ट रचना बंधुवर !
    तज धरा को जा चुकीं पर सर्वदा मुझको लगे,
    पेड़, छैया, नद, पवन बन संग तुम अविराम हो।

    ReplyDelete

मेरी हौसला-अफजाई करने का बहुत शुक्रिया.... आपकी बेशकीमती रायें मुझे मेरी कमजोरियों से वाकिफ करा, मुझे उनसे दूर ले जाने का जरिया बने, इन्हीं तमन्नाओं के साथ..... आपका हबीब.

"अपनी भाषा, हिंदी भाषा" (हिंदी में लिखें)

एक नज़र इधर भी...