Saturday, September 24, 2011

ग़ज़ल

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धूप का तिनका तिनका जोड़.
चाँद की चादर बुनकर ओढ.

ताकत अपनी क्यूँ भुला है?
जाग के रुख दरिया का मोड़.

दाम अगर खुशिया मांगे तो, 
अम्बर खींच के तारे तोड़. 

मंजिल तुझे पुकार रही है,
भाग तू सबसे आगे दोड़.

गहरे पैठ मिले है मोती,
संग लहरों के कर ले होड़.

जीत राग के नगमें गा तू, 
रंजो गम की दुनिया छोड़. 

रत्न 'हबीब' छुपे सब मन में,
मान ले, मन की छाती कोड़.

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35 comments:

  1. ।बहुत सुन्दर गज़ल्।

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  2. आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा दिनांक 26-09-2011 को सोमवासरीय चर्चा मंच पर भी होगी। सूचनार्थ

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  3. उर्जा देती सुन्दर गज़ल ..

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  4. गहरे पैठ मिले है मोती,
    संग लहरों के कर ले होड़.
    jo baura dooban dara.... kismat kismat karta rahta hai

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  5. गजल गंगा बहा दी आपने बहुत ही अच्छा लिखा है आपने साधुवाद

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  6. ।बहुत सुन्दर और शानदार गज़ल्।...

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  7. दिल में प्रवेश करती हुई बेहतरीन ग़ज़ल |

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  8. achchha likh rahe ho tum bhi. shubhkamanaye...

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  9. छोटे बहर की उत्कृष्ट ग़ज़ल।

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  10. बहुत सुंदर गज़ल से नवाज़ा है आपने.

    बधाई.

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  11. गहरे पैठ मिले है मोती,
    संग लहरों के कर ले होड़.
    खूबसूरत गजल

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  12. कोमल भावों से सजी.....शानदार गज़ल् ।

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  13. गहरे पैठ मिले है मोती,
    संग लहरों के कर ले होड़....

    Awesome !

    .

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  14. ताकत अपनी क्यूँ भुला है?
    जाग के रुख दरिया का मोड़.
    गहरे पैठ मिले है मोती,
    संग लहरों के कर ले होड़.

    मेरी घरेलु भाषा भोजपुरी है.. इच्छा हुई की भोजपुरी में प्रतिक्रिया दूँ...

    बहुत बढ़िया लिखले बनी.. आभार.. राउर प्रतिक्रिया के हमरो बा इंतिजार.. एक बेर जरूर आइब.. राउर स्वागत बा...

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  15. गहरे पैठ मिले है मोती,
    संग लहरों के कर ले होड़.

    ...बहुत प्रेरक और सुन्दर गज़ल..

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  16. गहरे पैठ मिले है मोती,
    संग लहरों के कर ले होड़.

    जीत राग के नगमें गा तू,
    रंजो गम की दुनिया छोड़.

    वाह ...एक संदेश देती पंक्तियां ...अनुपम प्रस्‍तुति ।

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  17. ताकत अपनी क्यूँ भूला है?
    जाग के रुख दरिया का मोड़ |

    दाम अगर खुशिया मांगे तो,
    खींच के अम्बर, तारे तोड़ |

    वाह
    हिम्मत बढ़ाती --जान फूंकती |

    बधाई ||

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  18. जीत राग के नगमें गा तू,
    रंजो गम की दुनिया छोड़.

    बहुत खूब...वाह...

    (EK BAAR GHAZAL KI BAHAR CHECK KAR LEN PLS)

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  19. धूप का तिनका तिनका जोड़.
    चाँद की चादर बुनकर ओढ.
    ताकत अपनी क्यूँ भुला है?
    जाग के रुख दरिया का मोड़.

    खूबसूरत गजल, बधाई!!

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  20. जीने के लिये आत्म-विश्वास जगाती हुई बेमिसाल गज़ल.

    नटखट बालक जैसा है दु:ख
    मत इसके तू कान मरोड़.
    आज नहीं तो कल सुधरेगा
    सुख देगा यह ताबड़्तोड़.

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  21. आपको सपरिवार
    नवरात्रि पर्व की बधाई और शुभकामनाएं-मंगलकामनाएं !

    -राजेन्द्र स्वर्णकार

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  22. .


    चारों तरफ़ छा रहे हैं आप तो …
    क्या बात है !
    अच्छा लिख रहे हैं

    और श्रेष्ठ के लिए शुभकामनाएं हैं …

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  23. बहुत अच्छे शेर बन पढ़े हैं ... भाव बहुत ही लाजवाब हैं ...

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  24. गहरे पैठ मिले है मोती,
    संग लहरों के कर ले होड़।

    खूबसूरत ग़ज़ल।
    पाठक के दिलो-दिमाग में जगह बना लेने वाले शे‘र।

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  25. गहरे पैठ मिले है मोती,
    संग लहरों के कर ले होड़.
    ...प्रेरक। सदा याद रखने लायक।

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  26. धूप का तिनका तिनका जोड़.
    चाँद की चादर बुनकर ओढ.

    वाह! खूबसूरत मतले से आग़ाज़ हुआ इस उम्दा ग़ज़ल का!

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मेरी हौसला-अफजाई करने का बहुत शुक्रिया.... आपकी बेशकीमती रायें मुझे मेरी कमजोरियों से वाकिफ करा, मुझे उनसे दूर ले जाने का जरिया बने, इन्हीं तमन्नाओं के साथ..... आपका हबीब.

"अपनी भाषा, हिंदी भाषा" (हिंदी में लिखें)

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