Sunday, April 10, 2011

"बिना वजह"

सभी सम्माननीय मित्रों को सादर नमस्कार। जाने क्यूँ कुछ उदासी सी है... उदासी....!!! अनेकों बार उदासी का कोई कारण नहीं होता... उदासी कभी कभी यूँ भी आ जाती है... ढलती हुई शाम की तरह .... वक़्त के कागज़ पर मिटते हुए किसी नाम की तरह...

"अजीब सा एहसास है, बिना वज़ह, शाम कुछ उदास है, बिना वज़ह।

किसी के अरमानों का लहू फैला है, या सुर्ख यूँ ही आकाश है, बिना वज़ह। "

*

दूर क्षितिज में जगमग जगमग रंगबिरंगी माया है।

जाने क्यूँ इस दिल के अन्दर बेचैनी की छाया है।

*

साथ सभी हैं, पास सभी और माजी का इक दरिया भी,

यादों की तन्हाँ कश्ती पर तूफानों का साया है।

*

आ बैठें संग बात करें ओ मेरे तन्हाँ तन्हाँ मन,

तू ही तो हमराह है हरपल, तूने साथ निभाया है।

*

खारों पर चलते चलते ही शाम हौसले की आई,

फूलों के ख्वाब दिखा पांवों के छालों को बहलाया है।

*

रूठ ना मुझसे यार ऐसे कि दिल की धड़कन रूठ चले,

तेरी मुस्कानों को दिल ने धड़कन सा अपनाया है।

*

कहाँ करार पायेगा दिल यह मेरा, मेरे 'हबीब' बता,

कदम कदम पर दुनिया ने इन नज़रों को भरमाया है।

*

17 comments:

  1. shayad kahin kuchh vajah to hai mitra,
    bevajah yun hi akash surkh nahi hota.

    sundar abhivyakti...

    Abhar..

    ReplyDelete
  2. किसी के अरमानों का लहू फैला है , या सुर्ख यूँ ही आकाश है ...

    वाह ....हबीब जी आनंद आ गया इस दर्द को ....


    आ बैठें संग बात करें ओ मेरे तन्हाँ तन्हाँ मन
    तू ही तो हमराह है हरपल तुने साथ निभाया है

    क्या बात है .....
    बहुत खूब ....!!

    ReplyDelete
  3. साथ सभी हैं, पास सभी और माजी का इक दरिया भी,

    यादों की तन्हाँ कश्ती पर तूफानों का साया है।

    *

    आ बैठें संग बात करें ओ मेरे तन्हाँ तन्हाँ मन,

    तू ही तो हमराह है हरपाल, तूने साथ निभाया है।

    बहुत खूबसूरत गज़ल ...
    हरपाल की जगह हरपल कर लें ...

    उदासी क्यों है ? बेवजह तो कुछ नहीं होता

    ReplyDelete
  4. @ रश्मि प्रभा जी ललित भैया, संजीव भाई, हीर जी, संगीता दी, सुषमा जी, हौसला आफजाई का बहुत शुक्रिया.....
    संगीता दी, करेक्सन कर दिया है... .
    आभार...

    ReplyDelete
  5. waah behtarin panktiyan hai bhaiya............badhai !!

    ReplyDelete
  6. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 12 - 04 - 2011
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

    http://charchamanch.blogspot.com/

    ReplyDelete
  7. bahut khoobsurat abhivyakti....ye blog hai na udasi door karne ke liye...fir kya pareshani...

    ReplyDelete
  8. आदरणीय हबीब भाई जी
    सादर सस्नेहाभिवादन !

    आपसे शत प्रतिशत सहमत हूं … होती है उदासी बहुत बार बिना वजह !
    मेरे मन की भी हालत अभी ऐसी ही है … बहुत प्यारे अज़ीज़ चाहने वालों से भी बात नहीं कर पा रहा हूं , डर है … उन्हें भी बिना वजह दुखी न करदूं …

    :) होता है …

    बहुत ख़ूबसूरत भावों के सथ बहुत प्यारी रचना के लिए आभार ! मन को सुकून मिला है पढ़ कर … सचमुच ! दिली मुबारकबाद और शुक्रिया !

    (आपकी मेल आईडी होती तो कभी संवाद हो पाता …)

    * श्रीरामनवमी की शुभकामनाएं ! *
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

    ReplyDelete
  9. बढ़िया है.
    आप मेरे ब्लॉग पर आये, आभार.

    ReplyDelete
  10. साथ सभी हैं पास सभी और माजी का एक दरिया भी,
    यादों की तन्हाँ कश्ती पर तूफानों का साया है !
    गहरे अहसास से भरा हुआ शेर !
    आभार !

    ReplyDelete
  11. आ बैठें संग बात करें ओ मेरे तन्हाँ तन्हाँ मन,

    तू ही तो हमराह है हरपल, तूने साथ निभाया है

    Waah...

    ReplyDelete

मेरी हौसला-अफजाई करने का बहुत शुक्रिया.... आपकी बेशकीमती रायें मुझे मेरी कमजोरियों से वाकिफ करा, मुझे उनसे दूर ले जाने का जरिया बने, इन्हीं तमन्नाओं के साथ..... आपका हबीब.

"अपनी भाषा, हिंदी भाषा" (हिंदी में लिखें)

एक नज़र इधर भी...