Wednesday, January 4, 2012

क्षणिकाएं


(1)

तुझे सोचा
तो उदासी घिर आई है
बादल बन कर,
स्मृतियों के कानन में
करवटें बदलने लगे हैं
मयूर... दर्द के...!!

(2)

वा का वह टुकड़ा
जो तुम्हारे गेसुओं के बीच
मुस्कुराता...
अठखेलियाँ करता था,
मेरी आँखों में
भाप बन कर बैठ गया है...
जानता हूँ, अभी यह
ठंडा होकर पिघलेगा...
भीतर उठेगी एक सुनामी....!!

(3)

तेरी यादों के बादल का
सिरहाना बना
सोया था...
रात विचरती रही
आसमान में, 
शायद मुझे साथ लिए हुए...

सुबह जागा
तो तर था चेहरा
शबनम की बूंदों से....

(4)

तेरे कहे शब्द
जुगनू बन कर बैठ जाते हैं
अक्सर
नीब पर कलम की...
लगता है
मानो खेल रहा हो
हाथों में मेरे, एक...
कस्तूरी मृग !!!

*********************

33 comments:

  1. मस्त क्षणिकाएं है।
    गागर मे सागर भर दिया है मित्र
    आभार

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  2. कमाल की क्षणिकाएं हैं... रोमांटिसिज्म की इन्तिहाँ है!! बहुत अच्छे!!

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  3. संजय भाई!
    मयूर दर्द के ... बिम्ब तो नया है, पर ... कुछ ... जम नहीं रहा।

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  4. हवा का वह टुकड़ा
    जो तुम्हारे गेसुओं के बीच
    मुस्कुराता...
    अठखेलियाँ करता था,
    मेरी आँखों में
    भाप बन कर बैठ गया है...
    जानता हूँ, अभी यह
    ठंडा होकर यह पिघलेगा...
    भीतर उठेगी एक सुनामी....!!
    ये दर्द की इंतहां को व्यक्त करती क्षणिका बेहद पसंद आई।

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  5. मानो खेल रहा हो
    हाथों में मेरे, एक...
    कस्तूरी मृग !!!
    बहुत खूब!!
    आपकी क्षणिकाएं भी बेहद रोचक, और सुंदर बिम्बों के प्रयोग से सजी हैं।

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  6. बहुत ही खुबसूरत और कोमल भावो की क्षणिकाएं....

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  7. कमाल की अभिव्यक्ति है !

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  8. चारों क्षणिकाएं चार नये बिम्ब लेकर आपकी चहुँमुखी प्रतिभा का बखान करती हुईं.

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  9. प्रस्तुति अच्छी लगी । मेरे नए पोस्ट " जाके परदेशवा में भुलाई गईल राजा जी" पर आपके प्रतिक्रियाओं की आतुरता से प्रतीक्षा रहेगी । नव-वर्ष की मंगलमय एवं अशेष शुभकामनाओं के साथ ।

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  10. सभी क्षणिकाएं एक से बढ़कर एक हैं... अनोखे भाव... आभार

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  11. सुन्दर क्षणिकाएं.
    वाह! पढकर मस्त हो गए जी.

    मेरे ब्लॉग पर आपका इंतजार है.

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  12. खूबसूरत क्षणिकाये पर इनका असली मजा मयखाने मे ही आयेगा

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  13. तेरे कहे शब्द
    जुगनू बन कर बैठ जाते हैं
    अक्सर
    नीब पर कलम की...
    लगता है
    मानो खेल रहा हो
    हाथों में मेरे, एक...
    कस्तूरी मृग !!!
    वाह...बहुत खूब ।

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  14. हवा का वह टुकड़ा
    जो तुम्हारे गेसुओं के बीच
    मुस्कुराता...
    अठखेलियाँ करता था,
    मेरी आँखों में
    भाप बन कर बैठ गया है...
    जानता हूँ, अभी यह
    ठंडा होकर यह पिघलेगा...
    भीतर उठेगी एक सुनामी....

    बहुत खूब ... वैसे सभी क्षणिकाओं का जवाब नहीं पर ये बहुत ही लाजवाब लगी ... आपको नव वर्ष की मंगल कामनाएं ...

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  15. सुंदर बिम्बों से सजी खूबसूरत क्षणिकाये.. बहुत बढ़िया लिखा है...

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  16. सभी अच्छी है अआखिर वाली सबसे ज़्यादा|

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  17. सारी क्षणिकाएं गहन भाव लिए हुए ... नए बिम्ब लिए हैं ..दर्द का मयूर ..और स्मृतियों का कानन बहुत अच्छा लगा ..

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  18. सारी क्षणिकाएँ एक से बढकर एक हैं ..

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  19. अलग२ भाव लिए चारों क्षणिकाएं बहुत सुंदर लगी,...बहुत खूब

    WELCOME to new post--जिन्दगीं--

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  20. सुंदर बिम्बों से सजी खूबसूरत क्षणिकाये.. बहुत बढ़िया !

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  21. बहुत ही बेहतरीन पोस्ट.........

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  22. खूबसूरत क्षणिकाये.....

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  23. बहुत बढ़िया प्रस्तुति,क्षणिकाएं अच्छी लगी,........
    welcome to new post--जिन्दगीं--

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  24. कुछ दर्द लिए ..कुछ याद लिए ...खूबसूरत क्षणिकाएं ....

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  25. सुंदर क्षणिकाएं....

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  26. तुझे सोचा
    तो उदासी घिर आई है
    बादल बन कर,
    स्मृतियों के कानन में
    करवटें बदलने लगे हैं
    मयूर... दर्द के...!!
    sundar kshanikayen........

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  27. तेरे कहे शब्द
    जुगनू बन कर बैठ जाते हैं
    अक्सर
    नीब पर कलम की...
    लगता है
    मानो खेल रहा हो
    हाथों में मेरे, एक...
    कस्तूरी मृग !!!

    क्या बात है, बहुत ख़ूब !!
    कविताओं में कस्तूरी की खुशबू महसूस की जा सकती है।

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  28. व्‍यापक फलक पर मचलते मन के नादान भाव.

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  29. हबीब साहब ! एक-एक क्षणिका बेमिसाल है ! बधाई !

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  30. अर्थ सहित .......कमाल ...कमाल

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  31. स्मृतियों के कानन में
    करवटें बदलने लगे हैं
    मयूर... दर्द के...!!
    ...
    यहाँ तो हालात जरा अलहदा है ...वो हमेशा नाचते ही रहते हैं हबीब साहब !
    ...
    हवा का वह टुकड़ा
    जो तुम्हारे गेसुओं के बीच
    मुस्कुराता...
    अठखेलियाँ करता था,
    मेरी आँखों में
    भाप बन कर बैठ गया है....
    ....
    हबीब साहब ..नज्म लिखो न आप तो आमादा-ऐ-क़त्ल है जनाब कमजोर दिल का बंदा हूँ हुज़ूर मर-मरा गया इतनी गहराई में डूब कर तो ...?
    ......
    तेरे कहे शब्द
    जुगनू बन कर बैठ जाते हैं
    अक्सर
    नीब पर कलम की...
    लगता है
    मानो खेल रहा हो
    हाथों में मेरे, एक...
    कस्तूरी मृग !!!
    .....वाह ! अगर छूट जाती मुझसे ये क्षणिकाएं तो ..समय बहुत कम मिल पाता है ...मगर ना जाने क्यों जहाँ मोहब्बत लिखी होती है वहाँ मैं पहुँच ही जाता हूँ !
    शुक्रिया हबीब साहब ...और लुटाते जाइये ये दौलत !!

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मेरी हौसला-अफजाई करने का बहुत शुक्रिया.... आपकी बेशकीमती रायें मुझे मेरी कमजोरियों से वाकिफ करा, मुझे उनसे दूर ले जाने का जरिया बने, इन्हीं तमन्नाओं के साथ..... आपका हबीब.

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