Friday, December 30, 2011

स्वागत नवागत -2 (दोहे)

समस्त सम्माननीय सुधि स्वजनों को नूतन वर्ष की सादर बधाईयाँ.....

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घट आया घट काल का, घटक गये सब रीत |.
स्वागत और विदाइयां, यह घट-घट की रीत.||

गया बरस प्यारा बड़ा, कुछ बाकी व्यौहार |
नया बरस चौखट खडा, गूंजत द्वाराचार.||

नई राह, नव चाह ले, नया नित्य उत्साह |
संगी सब ही संग हों, अरु साधें सद राह ||

मान, मेट मनभेद सब, मंतर जान महान |
एका से ताकत बढे, यही दिलाए मान ||

सदभावों की जोत ले, करें सुवागत आज |
अपनी पांखें तोल कर, भरें नया परवाज || 

पावन क्षण, मन माँगता, प्रभु से आज हबीब |
मृदु पुष्पित पथ हों सदा, दुख न आये करीब|| 
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शान्ति, सद्भाव और समृद्धि का पर्याय बने नया वर्ष... आमीन.
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Tuesday, December 27, 2011

ग़ालिब (ग़ज़ल)

सम्माननीय मित्रों, आज उर्दू अदब की रोशन मीनार शायरे आजम असदउल्ला खां ग़ालिब की जयन्ती है. ग़ालिब सचमुच ग़ालिब थे, यानि सबको जीत लेने  वाले... उनके शान में बाअदब चंद अशआर कहने की गुस्ताखी (गुस्ताखी ही तो कही जायेगी) के साथ शायरी के शिखर को सलाम....


शायरे आजम रहे, वो शायरे उलफत रहे।
ठोकरों में रंज को रख, शायरे इशरत रहे।

शायरी की इंजिला वह इक खजाना हैं बलंद,
अगरचे खुद जिंदगी भर सरहदे गुरबत रहे।

धडकनों में रंग भरकर माह चुप हो छुप गया,
अर्श-ए-हसरत रहे, गालिब शबे फुरकत रहे।

जौक का था वह अहद पर कब अहद के साथ वो,
आप अपनी राह के हादी रहे किसमत रहे।

वो गजल, वो नज्म, वो किस्से-कहानी मौज के,
दोस्ती की, हौसलों  की, आदतो-फितरत रहे।

ना सितारों की कमी चरखे अदब में है 'हबीब',
पर
ना गालिब को पढ़े तो कल्ब में कुरवत रहे।

****************(बह्रे रमल २१२२/२१२२/२१२२/212 )*****************
इशरत = ख़ुशी | इंजिला = प्रकाशित | अर्श = आसमान | फुरकत = वियोग, विरह | अहद = युग | हादी = मार्गदर्शक | चरखे अदब = साहित्याकाश | कल्ब = ह्रदय  | कुरवत = क्लेष |
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Saturday, December 24, 2011

मेरी क्रिसमस (कुण्डलिया)

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उजियारा पावन कहें, या कह दें सब ईश
क्रास ह्रदय में हो बना, या श्रद्धानत शीश
या श्रद्धानत शीश, राह सच की बतलाये
जीवन दे महकाय, सहज सद्प्रेम सिखाये
इश्वर का अवतार, जगत को दिये सहारा
सदा सदा उपलब्ध, बहे पावन उजियारा
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सभी सम्माननीय मित्रों को "बड़े दिन" की सादर शुभकामनाएं.
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"अपनी भाषा, हिंदी भाषा" (हिंदी में लिखें)

एक नज़र इधर भी...