Sunday, June 24, 2012

तलाश (दोहे)

समस्त सम्माननीय मित्रों को सादर नमन सहित आज प्रस्तुत है ओपन बुक्स आनलाईन महा उत्सव अंक १५ के लिए तलाश विषय रचित  दोहे.... 
 
आँखें अपनी हैं खुली, खोज रही चंहु ओर
जाने क्यूँ दिखता नहीं, नजरों से ही भोर ||

खेत तलासे नेह को, माटी मांगे स्वेद|
बरखा ढूंढे बीज सब, करे नहीं वो भेद||

पनघट को पनिहारिनें, पनघट मीठे गीत|
गोकुल गलियाँ ढूंढती, कांकर मटकी प्रीत||

गायें गोचर खोजती, गोचर कोमल दूब|
घर घर खोजे सांवरा, माखन खाए खूब ||

कोयलिया की तान हो, अमुवा चाहे नित्य|
मनवा भूखा ढूंढता, सहज सरस साहित्य ||  

सावन सूखे पेड़ को, पेड़ खगों के साज|
जंगल रोकर ढूंढता, हरियाली को आज||

नैया बोले नाखुदा, नदिया बोले नाव|
शहरों में खोजें कहाँ, भोले भाले गाँव ||

दिनकर ढूंढे ताल को, ताल खिला, दे फूल|
योग और सहयोग ही, खुशियों की हैं मूल ||

यौवन मांगे नौकरी, नौकर करे न काम|
सब के सब ही ढूंढते, अपने अपने राम ||

मधुर बोल नीची नज़र, जीवन का आधार|
विनम्रता को ढूंढता, गुरुता का सन्सार|१०|

बाट-बाट में खोजता, फिरता है अविराम|
अंदर क्यूँ झांके नहीं, जहाँ बसे घनश्याम|११|

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49 comments:

  1. अर्थ पूर्ण दोहे .....सादर

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  2. बहूत हि सुंदर बेहतरीन दोहे...
    :-)

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  3. बहुत शानदार दोहे हबीब जी

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  4. बाट-बाट में खोजता, फिरता है अविराम|
    अंदर क्यूँ झांके नहीं, जहाँ बसे घनश्याम|

    वाह !!!!! बहुत सुंदर दोहे,,,,,बधाई संजय जी

    RECENT POST,,,,,काव्यान्जलि ...: आश्वासन,,,,,

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  5. दिनकर ढूंढे ताल को, ताल खिला, दे फूल|
    योग और सहयोग ही, खुशियों की हैं मूल |८|

    बहुत सुंदर दोहे ...
    शुभकामनायें.

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  6. मधुर बोल नीची नज़र, जीवन का आधार|
    विनम्रता को ढूंढता, गुरुता का सन्सार|१०|

    सुंदर , अर्थपूर्ण दोहे...

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  7. सावन सूखे पेड़ को, पेड़ खगों के साज|
    जंगल रोकर ढूंढता, हरियाली को आज|६|

    सब के सब सुन्दर संग्रहणीय , आपसे अनुरोध मेल करने का कष्ट करेंगे ........

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  8. मनभावन दोहे..आनंद आ गया..

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  9. हृदय बसी सब शान्ति, जगत हम ढूढ़ें फिरते..बहुत ही सुन्दर रचना..

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  10. सावन सूखे पेड़ को, पेड़ खगों के साज|
    जंगल रोकर ढूंढता, हरियाली को आज... वाह

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  11. सावन सूखे पेड़ को, पेड़ खगों के साज|
    जंगल रोकर ढूंढता, हरियाली को आज|६|


    सभी दोहे कुछ न कुछ तलाश करते हुये ...बहुत सुंदर

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  12. बहुत प्यारे...मनभावन दोहे......

    सादर
    अनु

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  13. सुन्दर सार्थक दोहे!

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  14. सुन्दर और शानदार प्रस्तुति।

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  15. खेत तलासे नेह को, माटी मांगे स्वेद|
    बरखा ढूंढे बीज सब, करे नहीं वो भेद...

    very nice.

    .

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  16. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार २६/६ १२ को राजेश कुमारी द्वारा
    चर्चामंच पर की जायेगी

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  17. सावन सूखे पेड़ को, पेड़ खगों के साज|
    जंगल रोकर ढूंढता, हरियाली को आज|६|
    बहुत ही अर्थ पूर्ण दृष्टि से संसिक्त दोहावली -
    ये तेजाबी बारिशें ,बिजली घर की राख ,
    एक दिन होगा भूपटल वारणावर्त की लाख .

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  18. बहुत ही शानदार...

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  19. behad arthpoorn rchna , vastvikta ke behad kreeb .
    bdhai .

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  20. अनुपम ... लाजवाब दोहे हाँ सभी ... हर दोहा तलाश शब्द पे सार्थक उतरता है ... बहुत सुन्दर .... बधाई ...

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  21. खेत तलासे नेह को, माटी मांगे स्वेद|
    बरखा ढूंढे बीज सब, करे नहीं वो भेद|२|

    सग्रहनीय दोहे .....
    भैया जी संग्रह हेतु आपके मेल का इंतजार

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  22. हर दोहा लाजवाब!
    मुझे यह विशेष रूप से पसंद आया
    पनघट को पनिहारिनें, पनघट मीठे गीत|
    गोकुल गलियाँ ढूंढती, कांकर मटकी प्रीत|३|

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  23. नैया बोले नाखुदा, नदिया बोले नाव|
    शहरों में खोजें कहाँ, भोले भाले गाँव |७|

    वाह क्या बात है हबीब साहब आनुप्रासिक छटा बिखेर दी इस दोहे में नगर नगर चहूँ और हैं कहाँ ढूंढता गाँव ./काट दिए सब पेड़ तो फिर क्यों ढूंढें छाँव ..शहरीकरण को संबोधित बेहतरीन भाव दोहा .
    ......वीरुभाई परदेसिया .४३,३०९ ,सिल्वर वुड ड्राइव ,कैंटन ,मिशिगन ४८ ,१८८

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  24. सभी दोहे एक से बढकर एक। तलाश अच्छी तो मंज़िल खूब!

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  25. प्रवास से लौटते ही बनता हूँ कोई जवाबी दोहा.

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  26. पनघट को पनिहारिनें, पनघट मीठे गीत|
    गोकुल गलियाँ ढूंढती, कांकर मटकी प्रीत|३|

    वाह ! सभी दोहे एक से बढ़ कर एक...

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  27. बहुत भावपूर्ण दोहे |
    आशा

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  28. bahut bahut hi badhiya lage aapke dohe ---
    sabhi arthpurn v ek se badh kar ek
    aabhaar
    poonam

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  29. खेत तलासे नेह को, माटी मांगे स्वेद|
    बरखा ढूंढे बीज सब, करे नहीं वो भेद


    मधुर बोल नीची नज़र, जीवन का आधार|
    विनम्रता को ढूंढता, गुरुता का सन्सार

    अर्थपूर्ण दोहे ...बहुत बढ़िया

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  30. पनघट को पनिहारिनें, पनघट मीठे गीत|
    गोकुल गलियाँ ढूंढती, कांकर मटकी प्रीत|

    कमाल है ...
    बेहद प्रभावशाली रचना ! आभार आपका !

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  31. खेत तलासे नेह को, माटी मांगे स्वेद,
    बरखा ढूंढे बीज सब, करे नहीं वो भेद।

    अनुपम भाव संजोए हैं आपने इन सुंदर दोहों में।

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  32. वाह ... बहुत खूब सभी दोहे एक से बढ़कर एक ... आभार

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  33. बहुत सुन्दर और शानदार प्रस्तुति।..आभार

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  34. अन्दर झांके क्यों नहीं , जहाँ बसे घंस्यम.....वाह

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  35. खेत तलासे नेह को, माटी मांगे स्वेद|
    बरखा ढूंढे बीज सब, करे नहीं वो भेद|२|
    मधुर बोल नीची नज़र, जीवन का आधार|
    विनम्रता को ढूंढता, गुरुता का सन्सार|१०|

    बाट-बाट में खोजता, फिरता है अविराम|
    अंदर क्यूँ झांके नहीं, जहाँ बसे घनश्याम

    प्रिय मिश्र जी कविले तारीफ आप के दोहे ...किस किस की तारीफ़ की जाए ..सुन्दर सन्देश ....बधाई हो

    भ्रमर ५
    भ्रमर का दर्द और दर्पण

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  36. एक से बढ़क एक खूबसूरत दोहे।..वाह!

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  37. बहुत सुंदर,
    सभी दोहे एक से बढकर एक

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  38. दिनकर ढूंढे ताल को, ताल खिला, दे फूल|
    योग और सहयोग ही, खुशियों की हैं मूल |८|

    यौवन मांगे नौकरी, नौकर करे न काम|
    सब के सब ही ढूंढते, अपने अपने राम |९|

    मधुर बोल नीची नज़र, जीवन का आधार|
    विनम्रता को ढूंढता, गुरुता का सन्सार|१०|

    वाह संजय जी ........बहुत ही खूबसूरती से बयान की गई है हर पंक्ति...........बधाई हो ...

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  39. सरस दोहावली ,अर्थ गर्भित दोहे सारे के सारे ,समेटे सारा परिवेश .

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  40. बहुत खूबशूरत भावों की अभिव्यक्ति ,,,
    सुंदर संम्प्रेषण,,,,

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  41. I read your post interesting and informative. I am doing research on bloggers who use effectively blog for disseminate information.My Thesis titled as "Study on Blogging Pattern Of Selected Bloggers(Indians)".I glad if u wish to participate in my research.Please contact me through mail. Thank you.

    http://priyarajan-naga.blogspot.in/2012/06/study-on-blogging-pattern-of-selected.html

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  42. अप्रतिम प्रस्तुति है आपकी सार्वकालिक .

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  43. एक से बढ़क एक खूबसूरत दोहे सुंदर प्रस्तुति है

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  44. आज आपके ब्लॉग पर बहुत दिनों बाद आना हुआ अल्प कालीन व्यस्तता के चलते मैं चाह कर भी आपकी रचनाएँ नहीं पढ़ पाया. व्यस्तता अभी बनी हुई है लेकिन मात्रा कम हो गयी है...:-)

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  45. खेत तलासे नेह को, माटी मांगे स्वेद,
    बरखा ढूंढे बीज सब, करे नहीं वो भेद।

    सभी दोहे बहुत सुन्दर लग रहे हैं...
    सादर बधाई !!

    आ० सर,
    इस लिंक पर आपके हाइगा प्रकाशित हैं|
    अवलोकन करने की कृपा करें|
    http://hindihaiga.blogspot.in/2012/07/blog-post.html

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  46. अनुभव में रहता छिपा,है जीवन का सार
    पहले बांटें,तो मिले,मुक्त हृदय से प्यार!

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मेरी हौसला-अफजाई करने का बहुत शुक्रिया.... आपकी बेशकीमती रायें मुझे मेरी कमजोरियों से वाकिफ करा, मुझे उनसे दूर ले जाने का जरिया बने, इन्हीं तमन्नाओं के साथ..... आपका हबीब.

"अपनी भाषा, हिंदी भाषा" (हिंदी में लिखें)

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