Monday, December 5, 2011

दोहे (भांति भांति के रंग)

सम्मुख मो सम मुख लिये, बैठा रूप विराट ।
अहंकार मेरा सदा, रोके मेरा बाट ।।

फूट गया दिन का किला, रजनी आई फूट ।
मुल्क रहे ना फूट भर, जिनमें पड़ती फूट ।।

जंगल गाय गीत हरे, पल पल सुबहो शाम ।
पर्यावरण बचाने को, जंग लडें अविराम ।।

अपना अन्तर सत्य ही, जैसे एक दर्पन
दर्प न मन में लाईये, निर्मल राखिये मन ।।

मंजिल नज़रों में सदा, लक्षित हो स्पष्ट ।
बड़ा निज विश्वास करे, छोटे सारे कष्ट ।।

हिम्मत बहता है सदा, संग रुधिर बन होश ।
हिम मत बनने दे कभी, दह्काया रख जोश ।।

अपने हाथों भाग है, ले संवार तू भाग ।
बैठे भाग न जागता, भाग जगाने भाग ।।

सावन जाने नेह का, बीत गया किस ओर ।
रजनी बिन रजनीश है, व्याकुल हुआ चकोर ।।
 
रजनी जागत गत हुई, सजना रहे विदेश ।
सजना सजनी का हुआ, बिन सजना अतिशेष ।।

समझे, गुनें, शांत हो, थोड़ी रख परवाह ।
वक्त सुझाए वक्त में, हर उलझन की राह ।।

महका दोहों का चमन, भांति भांति के रंग ।
महका लें हम जिंदगी, सदभावों के संग ।।

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35 comments:

  1. दोहों पर प्रयास सराहनीय है
    आप में संभावनाएं प्रचुर मात्रा में हैं

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  2. जंगल गाय गीत हरे, पल पल सुबहो शाम ।
    पर्यावरण बचाने को, जंग लडें अविराम ।।
    ... arth bhare dohe , bahut hi achhe lage

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  3. प्रभावशाली अभिवयक्ति.....

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  4. सुंदर दोहे, शब्द शब्द दूह लिया। मन मोह लिया।

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  5. दोहों के लघु कलेवर में यमक के चमत्कार से मनोहारी अर्थ-योजना !
    सुन्दर !

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  6. खूबसूरत प्रस्तुति ||
    बहुत बहुत बधाई ||

    terahsatrah.blogspot.com

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  7. रजनी जागत गत हुई, सजना रहे विदेश ।
    सजना सजनी का हुआ, बिन सजना अतिशेष ।।


    वाह वाह वाह क्या दोहे रचे है संजय जी. सभी एक से बढकर एक है. बहुत बधाई इस प्रस्तुति के लिए.

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  8. महका लें हम जिंदगी मनोहारी दोहे के संग | हार्दिक शुभकामनायें
    ..

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  9. समझे, गुनें, शांत हो, थोड़ी रख परवाह ।
    वक्त सुझाए वक्त में, हर उलझन की राह ।।

    गहन ....अर्थ पूर्ण और बहुत सुंदर दोहे

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  10. दोहों के माध्यम से आपने बड़े
    सहज ढंग से सब कुछ कह डाला.
    अति सुंदर प्रयास.
    धन्यवाद.
    आनंद विश्वास.

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  11. जी हाँ बिलकुल यह चमन तो दोहों से महका हुआ है और सच्चाई की खुशबू बिखेर रहा है.

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  12. वाह ...बहुत ही सुन्दर और लाजबाब दोहे हैं ....

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  13. मनुहारी दोहे लगे सुंदर लगा प्रयास
    इसी तरह लिखते रहो,नित करो अभ्यास,
    बहुत बढ़िया ,....
    मेरे नए पोस्ट में आइये,...

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  14. apke yah rang - birange dohe bahut hi sundar hai...

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  15. vah mishr ji badhai ......... bhai aj k smay me Doha Ko sundartm roop dekar use aur saras v jeevant kiya hai . Badhai Habib bhai..

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  16. वाह हर शेर में अंदाज़े बयानी लाजवाब है....
    .हार्दिक आभार हबीब जी

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  17. अच्छा साधा है आपने अपनी कला को। सुमधुर,सहज और सत्यपरक।

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  18. सभी दोहे बहुत अच्छे ..सार्थक सन्देश देते हुए

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  19. आपका प्रयास अच्छा है,थोड़ा संपादन पर ध्यान दें,और बढ़िया बन जायेगा !

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  20. आपका पोस्ट मन को प्रभावित करने में सार्थक रहा । बहुत अच्छी प्रस्तुति । मेर नए पोस्ट ' आरसी प्रसाद सिंह ' पर आकर मेरा मनोबल बढ़ाएं । धन्यवाद ।

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  21. समझे, गुनें, शांत हो, थोड़ी रख परवाह ।
    वक्त सुझाए वक्त में, हर उलझन की राह ।।
    बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

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  22. समझे, गुनें, शांत हो, थोड़ी रख परवाह ।
    वक्त सुझाए वक्त में, हर उलझन की राह
    सार्थक सन्देश .

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  23. यमक का बढ़िया प्रयोग हुआ है दोहों में.

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  24. सार्थक सन्देश देते हुए बहुत सुन्दर दोहे...आभार...

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  25. सभी दोहे बहुत अच्छे ....सन्देश देते हुए

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  26. बहुत सुंदर और सटीक दोहे..

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  27. बहुत सुन्दर दोहे...और सार्थक भी..

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  28. संजय जी,..बहुत सुंदर सार्थक दोहे,पसंद आए,..बधाई

    मेरे नए पोस्ट की चंद लाइने पेश है..........

    नेताओं की पूजा क्यों, क्या ये पूजा लायक है
    देश बेच रहे सरे आम, ये ऐसे खल नायक है,
    इनके करनी की भरनी, जनता को सहना होगा
    इनके खोदे हर गड्ढे को,जनता को भरना होगा,

    अगर आपको पसंद आए तो समर्थक बने....
    मुझे अपार खुशी होगी,......धन्यबाद....

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  29. अपने हाथों भाग है, ले संवार तू भाग ।
    बैठे भाग न जागता, भाग जगाने भाग ।।

    भाग के अलग अलग अर्थ से प्रभावी बन पड़ा है

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  30. अपने हाथों भाग है, ले संवार तू भाग ।
    बैठे भाग न जागता, भाग जगाने भाग ।
    दोहों छटा निराली है ,मनभावन और मतवाली है .

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  31. गहरे अर्थपूर्ण दोहे हैं सभी ... कमाल के सब ...

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मेरी हौसला-अफजाई करने का बहुत शुक्रिया.... आपकी बेशकीमती रायें मुझे मेरी कमजोरियों से वाकिफ करा, मुझे उनसे दूर ले जाने का जरिया बने, इन्हीं तमन्नाओं के साथ..... आपका हबीब.

"अपनी भाषा, हिंदी भाषा" (हिंदी में लिखें)

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