शोरोगुल सुन घबराया सत्य
बापू की प्रतिमा के पीछे
छुप कर बैठ गया...
डरे, सहमे, सशंकित भाव से
उसने झाँक कर देखा
नारे लगाती
भीड़ के आगे चलते हुए,
झक सफ़ेद
खादी में लिपटे
वे आये,
बापू की प्रतिमा में
माल्यार्पण किया,
चरणस्पर्श किया,
'पीछे' आई भीड़ को
बापू के बताये रास्ते में...
बापू के 'पीछे' चलने की शिक्षा दी...
और बापू की ओर
पीठ फेर कर चल दिए...
'पीछे' आई भीड़ भी
'पीछे' चल दी....
'पीछे' रह गए...
बापू और सत्य !!!
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