Sunday, October 3, 2010

"बापू और सत्य"

शोरोगुल सुन
घबराया सत्य
बापू की प्रतिमा के पीछे
छुप कर बैठ गया...

डरे, सहमे, सशंकित भाव से
उसने झाँक कर देखा
नारे लगाती
भीड़ के आगे चलते हुए,
झक सफ़ेद
खादी में लिपटे
वे आये,
बापू की प्रतिमा में
माल्यार्पण किया,
चरणस्पर्श किया,
'पीछे' आई भीड़ को
बापू के बताये रास्ते में...
बापू के 'पीछे' चलने की शिक्षा दी...
और बापू की ओर
पीठ फेर कर चल दिए...
'पीछे' आई भीड़ भी
'पीछे' चल दी....

'पीछे' रह गए...
बापू और सत्य !!!

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Friday, October 1, 2010

"नमन"

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" कहने को कुछ आज नहीं, बस नमन राष्ट्र का हो स्वीकार
आपके सपने बने रहें इस भव्य - भवन का चिर आधार
इक छोटा सा संकल्प उठाते, लाल हिंद के आज सभी
साथ रहेंगे, साथ बढ़ेंगे, ख़्वाबों को करने साकार॥"
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Wednesday, September 29, 2010

"शाम यहाँ ना घबराती आये...."

समस्त सम्माननीय सुधि मित्रों को सादर नमस्कार। कुछ अवकाश के पश्चात एक ग़ज़ल... एक अपील के रूप में, बिना किसी भूमिका के यह पोस्ट हिंद के आवाम को नज्र करता हूँ...




तारीख को एक नया मोड़ दें।
सब दीवारों को आओ तोड़ दें।


खुदा वहां कहाँ मिलेगा दोस्त,
प्रपंची राहों को छोड़ दें।
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भाई रहकर वक्ते मुश्किल में भी,
दुनिया को मिसाल एक बेजोड़ दें।

मुल्क अपना अच्छा, सारे जहाँ से
जिस्म को इसके न फिरकाई कोढ़ दें।

गलत राह दिखाए जो सबको 'हबीब',
ऐसे वाईज की क्यों न गर्दन ही मरोड़ दें।
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शब्दार्थ: वाईज = उपदेशक।

"अपनी भाषा, हिंदी भाषा" (हिंदी में लिखें)

एक नज़र इधर भी...