Wednesday, February 15, 2012

क्षणिकाएं

खुशी

गुलाब की
पांखुरी को छूते ही
खामोशी से उतर आई
मेरी तर्जनी की नाख़ून पर
मुस्कुराती हुई
ओस की एक बूँद.....

अभी,
मेरी नाडियों का स्पंदन
मुझे डराने लगा है....
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अस्तित्व

मैंने सोचा था,
वह एक बूँद है....
गिरकर पलकों से
ज़मीन में कहीं खो जाएगा....
मैं गलत था...!
वह एक बूँद का सागर
फैला है दिगंत तक
मेरे सम्मुख....

उसे पार करना
मेरे वश का नहीं,
और डूबने का सलीका
मैं सीख न सका.....!!
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भ्रम

र्द की टहनी से
बिछड आये पत्ते ने
पलकों पर दस्तक दी...
देखा....
चेहरे पर
बेइंतहा ज़र्दी के बीच
चंद हरियाले से छींटे...

यह क्या...!!!
मैंने आँखें मलकर
दोबारा देखा...
कहीं मेरे सामने कोई
आईना तो नहीं.... 
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विरह

मेरे दोस्त...
मेरी राहे हयात से
क्यूँ समेट ली तुमने
अपनी यादों की धूप...??

देख..!
मेरे लफ़्ज़ों की तरह
मेरी रूह भी ठिठुरी जाती है....
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Sunday, February 12, 2012

गृह प्रवेश


मस्त स्नेही मित्रों को सादर अभिवादन. कुछ समय से जिस अत्यधिक व्यस्तता के चलते आप सभी स्नेहीजनों से अवांछित दूरी बनी रही उसका पटाक्षेप मंत्रोच्चार व शंख ध्वनि के साथ बड़े ही पवित्र ढंग से हुआ. इश्वर की असीम अनुकम्पा, पूर्वजों के आशीर्वाद और आप सभी स्वजनों के शुभकामनाओं के चलते आपके इस मित्र का छोटा सा आशियाना तैयार हो गया और गृह पूजा का कार्यक्रम भी १० फ़रवरी को संपन्न हुआ. 

अनुकंपा प्रभु की रही, पुरखों का आशीष |
छोटा मेरा आशियाँ, खडा उठाये शीश ||

परिवार के साथ ब्लॉग जगत के अभिन्न सम्माननीय मित्रों बड़े भईया गिरीश पंकज , ब्लॉग गुरु ललित शर्मा , दिल की बातें कहने वाले भाई भाई स्वराज्य करुण , अभियान भारतीय के भाई गौरव शर्मा भारतीय, गिरीश दुबे, सरित मिश्रा,  शंख ध्वनि करने वाले भाई ललित मिश्रा , कशिश  की श्रीमती सुनीता शर्मा सहित की प्रत्यक्ष उपस्थिति के साथ अंतर्जालीय मित्रों के निश्छल शुभकामनाओं से यह पुनीत अवसर मेरे पूरे परिवार के लिए अविस्मरनीय बन गया. प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष स्नेह व शुभकामनाएं देकर मुझे उत्साहित करने वाले आप सभी सम्माननीय मित्र ह्रदय से आभार तथा सदभावनाएँ बनाए रखने का सादर निवेदन स्वीकारें. प्रस्तुत है इस अवसर के कुछ छाया चित्र.
छोटा सा आशियाना
पूजा का दिन
  
सपत्निक गृह प्रवेश

हवन 
भतीजी और भांजी द्वारा "हाथा" की रीत
"माँ" प्रसाद ग्रहण करते हुए
"माँ" भईया गिरीश पंकज जी  के साथ चर्चा
ब्लॉगर और मित्र मंडली
"दादी पोता" पुत्र आयाम दादी के साथ. 


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सादर 
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"अपनी भाषा, हिंदी भाषा" (हिंदी में लिखें)

एक नज़र इधर भी...