(1)
तुझे सोचा
तो उदासी घिर आई है
बादल बन कर,
स्मृतियों के कानन में
करवटें बदलने लगे हैं
मयूर... दर्द के...!!
(2)
हवा का वह टुकड़ा
जो तुम्हारे गेसुओं के बीच
मुस्कुराता...
अठखेलियाँ करता था,
मेरी आँखों में
भाप बन कर बैठ गया है...
जानता हूँ, अभी यह
ठंडा होकर पिघलेगा...
भीतर उठेगी एक सुनामी....!!
(3)
तेरी यादों के बादल का
सिरहाना बना
सोया था...
रात विचरती रही
आसमान में,
शायद मुझे साथ लिए हुए...
सुबह जागा
तो तर था चेहरा
शबनम की बूंदों से....
(4)
तेरे कहे शब्द
जुगनू बन कर बैठ जाते हैं
अक्सर
नीब पर कलम की...
लगता है
मानो खेल रहा हो
हाथों में मेरे, एक...
कस्तूरी मृग !!!
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