Wednesday, January 4, 2012

क्षणिकाएं


(1)

तुझे सोचा
तो उदासी घिर आई है
बादल बन कर,
स्मृतियों के कानन में
करवटें बदलने लगे हैं
मयूर... दर्द के...!!

(2)

वा का वह टुकड़ा
जो तुम्हारे गेसुओं के बीच
मुस्कुराता...
अठखेलियाँ करता था,
मेरी आँखों में
भाप बन कर बैठ गया है...
जानता हूँ, अभी यह
ठंडा होकर पिघलेगा...
भीतर उठेगी एक सुनामी....!!

(3)

तेरी यादों के बादल का
सिरहाना बना
सोया था...
रात विचरती रही
आसमान में, 
शायद मुझे साथ लिए हुए...

सुबह जागा
तो तर था चेहरा
शबनम की बूंदों से....

(4)

तेरे कहे शब्द
जुगनू बन कर बैठ जाते हैं
अक्सर
नीब पर कलम की...
लगता है
मानो खेल रहा हो
हाथों में मेरे, एक...
कस्तूरी मृग !!!

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Friday, December 30, 2011

स्वागत नवागत -2 (दोहे)

समस्त सम्माननीय सुधि स्वजनों को नूतन वर्ष की सादर बधाईयाँ.....

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घट आया घट काल का, घटक गये सब रीत |.
स्वागत और विदाइयां, यह घट-घट की रीत.||

गया बरस प्यारा बड़ा, कुछ बाकी व्यौहार |
नया बरस चौखट खडा, गूंजत द्वाराचार.||

नई राह, नव चाह ले, नया नित्य उत्साह |
संगी सब ही संग हों, अरु साधें सद राह ||

मान, मेट मनभेद सब, मंतर जान महान |
एका से ताकत बढे, यही दिलाए मान ||

सदभावों की जोत ले, करें सुवागत आज |
अपनी पांखें तोल कर, भरें नया परवाज || 

पावन क्षण, मन माँगता, प्रभु से आज हबीब |
मृदु पुष्पित पथ हों सदा, दुख न आये करीब|| 
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शान्ति, सद्भाव और समृद्धि का पर्याय बने नया वर्ष... आमीन.
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"अपनी भाषा, हिंदी भाषा" (हिंदी में लिखें)

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