समस्त सम्माननीय सुधि स्वजनों को नूतन वर्ष की सादर बधाईयाँ.....
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घट आया घट काल का, घटक गये सब रीत |.
स्वागत और विदाइयां, यह घट-घट की रीत.||
गया बरस प्यारा बड़ा, कुछ बाकी व्यौहार |
नया बरस चौखट खडा, गूंजत द्वाराचार.||
नई राह, नव चाह ले, नया नित्य उत्साह |
संगी सब ही संग हों, अरु साधें सद राह ||
मान, मेट मनभेद सब, मंतर जान महान |
एका से ताकत बढे, यही दिलाए मान ||
सदभावों की जोत ले, करें सुवागत आज |
अपनी पांखें तोल कर, भरें नया परवाज ||
पावन क्षण, मन माँगता, प्रभु से आज हबीब |
मृदु पुष्पित पथ हों सदा, दुख न आये करीब||
स्वागत और विदाइयां, यह घट-घट की रीत.||
गया बरस प्यारा बड़ा, कुछ बाकी व्यौहार |
नया बरस चौखट खडा, गूंजत द्वाराचार.||
नई राह, नव चाह ले, नया नित्य उत्साह |
संगी सब ही संग हों, अरु साधें सद राह ||
मान, मेट मनभेद सब, मंतर जान महान |
एका से ताकत बढे, यही दिलाए मान ||
सदभावों की जोत ले, करें सुवागत आज |
अपनी पांखें तोल कर, भरें नया परवाज ||
पावन क्षण, मन माँगता, प्रभु से आज हबीब |
मृदु पुष्पित पथ हों सदा, दुख न आये करीब||
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शान्ति, सद्भाव और समृद्धि का पर्याय बने नया वर्ष... आमीन.
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