Sunday, December 18, 2011

आह!

तेरी सूखी यादों के
photo taken with thanks from google & edited
तिनके चुन चुन कर
बनाया एक घर
बैठकर उसके भीतर
गाने लगा नज़्म मुहब्बत की
कि उट्ठेन्गी लपटें...
मुझे भी कर देंगी भस्म
साथ साथ घर के....

लेकिन मेरी आवाज में
कुकनुस* वाली बात कहाँ?
कि जल उट्ठे आग...

मुझे तो जीना होगा
उस चकोर की तरह
जो ठंडी चांदनी में
जलता तो उम्र भर
भस्म नहीं होता जल कर....!!!
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कुकनुस = (काल्पनिक यूनानी पक्षी) जिसके बारे में कहा जाता है कि वह बहुत मधुर स्वर में गाता है, और उसके गाने से घोंसले में आग लग जाती है... वह जल कर भस्म हो जाता है.
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Wednesday, December 14, 2011

अहसास

शहरे अलफाज का सौदागर, अहसासों के गुलशन में,
ले कर झोली भर गीत मधुर, बैठा है लब खामोश लिए ।

कुछ भीगे से, कुछ खिलते से, कुछ मुरझाते, कुछ सपनीले,
कुछ उलझे से, कुछ सुलझे से, कुछ ख्वाब हसीं आगोश लिए ।

कुछ यार मिले, गमख्वार मिले, कुछ इश्को सुकूं, कुछ शिकवे गिले,
कुछ मंजर वाबस्ता दिल में, कुछ खुशियाँ, कुछ अफसोस लिए ।

कुछ अपने हैं, कुछ अपनाए, कुछ पलते हैं बिन बतलाये,
कुछ रंज हमेशा मुस्काते, संग आते इक सा जोश लिए ।

कुछ यादें हैं, कुछ फरियादें, कुछ जाम विसाले माह के हैं,
कुछ ख्वाब लिए सरशार फलक, जागा है दिल मदहोश लिए।

कुछ चहके से, कुछ बहके से, यादों के जुगनू महके से,
कुछ गुल राहों में देख हबीब खिले नगमा-ए-नोश लिये।

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* मंजर = दृश्य | वाबस्तः = सम्बद्ध | सरशार = नशे में मत्त | विसाल = मिलन | नोश = अमृत 
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"अपनी भाषा, हिंदी भाषा" (हिंदी में लिखें)

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