तेरी सूखी यादों के
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| photo taken with thanks from google & edited |
तिनके चुन चुन कर
बनाया एक घर
बैठकर उसके भीतर
गाने लगा नज़्म मुहब्बत की
कि उट्ठेन्गी लपटें...
मुझे भी कर देंगी भस्म
साथ साथ घर के....
लेकिन मेरी आवाज में
कुकनुस* वाली बात कहाँ?
कि जल उट्ठे आग...
मुझे तो जीना होगा
उस चकोर की तरह
जो ठंडी चांदनी में
जलता तो उम्र भर
भस्म नहीं होता जल कर....!!!
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कुकनुस = (काल्पनिक यूनानी पक्षी) जिसके बारे में कहा जाता है कि वह बहुत मधुर स्वर में गाता है, और उसके गाने से घोंसले में आग लग जाती है... वह जल कर भस्म हो जाता है.
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