जागा है हिन्दुसतान, ना सोने देना साथी...
आज इस सहर की शाम ना होने देना साथी...
बहुत किये समझौते हमने,
आशाओं को सूली दी..
कदम कदम पर सपने मारे,
अपने, उन्हें वसूली दी..
आज उठाया है सर अपना,
स्वाभिमान फिर पाने को..
कदम रुके मत, साहस ना खोने देना साथी....
आज इस सहर की शाम ना होने देना साथी...
स्वतन्त्रता की खातिर था,
लगा शहीदों का मेला..
भारत पर कुर्बान हुआ जो,
हर बेटा था अलबेला..
उनकी यादें मिटा रहे वो,
भ्रष्टाचार निभाने को..
उन शहीदों को गुमनाम ना होने देना साथी...
आज इस सहर की शाम ना होने देना साथी...
वो कहते अधिकार नहीं है,
अपनी बात सुनाने की..
उनको कहाँ मिली इजाजत,
देश बेच कर खाने की..
अब ना खाने देंगे आओ,
अपना मुल्क बचाने को..
अब अपनी आँखों को, फिर ना रोने देना साथी...
आज इस सहर की शाम ना होने देना साथी...
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