Saturday, August 20, 2011

"शाम ना होने देना साथी"

जागा है हिन्दुसतान, ना सोने देना साथी...
आज इस सहर की शाम ना होने देना साथी...


बहुत किये समझौते हमने,
आशाओं को सूली दी..
कदम कदम पर सपने मारे,
अपने, उन्हें वसूली दी..
आज उठाया है सर अपना,
स्वाभिमान फिर पाने को..
कदम रुके मत, साहस ना खोने देना साथी....
आज इस सहर की शाम ना होने देना साथी...


स्वतन्त्रता की खातिर था,
लगा शहीदों का मेला..
भारत पर कुर्बान हुआ जो,
हर बेटा था अलबेला..
उनकी यादें मिटा रहे वो,
भ्रष्टाचार निभाने को..
उन शहीदों को गुमनाम ना होने देना साथी...
आज इस सहर की शाम ना होने देना साथी...


वो कहते अधिकार नहीं है,
अपनी बात सुनाने की..
उनको कहाँ मिली इजाजत,
देश बेच कर खाने की..
अब ना खाने देंगे आओ,
अपना मुल्क बचाने को..
अब अपनी आँखों को, फिर ना रोने देना साथी...
आज इस सहर की शाम ना होने देना साथी...



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Sunday, August 14, 2011

"लोकतंत्र है...."

जिसकी जो मरजी है गाओ, लोकतंत्र है /
जनता तो है ढोल; बजाओ, लोकतंत्र है /

एवरेस्ट विजय को निकली है मंहगाई,
भूखे भज के सब सो जाओ, लोकतंत्र है /

टू जी, और सी डब्लू जी, है गुल्लक अपनी,
आमदनी को खूब बढाओ, लोकतंत्र है /

पांच सितारा होटल मानिन्द वहाँ व्यवस्था,
जाओ भाइ जेल हो आओ, लोकतंत्र है /

मुट्ठी में क़ैदी कानून, फिर चिंता कैसी,
बेटी-बहन की लाज उड़ाओ, लोकतंत्र है /

लहू की किस्मत ही बहना है, बह जाने दो,
हत्यारों के दिल बहलाओ, लोकतंत्र है /

मुर्गा एक टंगा तंदूर में, बड़ा लज़ीज़,
मुल्क समूचा भून के खाओ, लोकतंत्र है /

सुप्रीम-कोर्ट की ना सुनते वो, अपनी क्या,
लोकपाल के नगमें गाओ, लोकतंत्र है /

बीत गया है दिन स्वेद बहाते, स्वाद विहीन,
रोटी के अब ख्वाब सजाओ, लोकतंत्र है /

आड़े आते हैं जो भी काले कृत्यों के,
आधी रतिया जा निपटाओ, लोकतंत्र है /

जी.डी.पी. और ग्रोथ रेट की ग्राफ बना कर,
विश्व सहित खुद को बहलाओ, लोकतंत्र है /

फसलें बारूद की उगती जंगल-घाटी में,
नीरो बन; बांसुरी बजाओ, लोकतंत्र है /

सैतालिस के पहले, बाद में है अंतर क्या?
लब ‘हबीब’ के आ सी जाओ, लोकतंत्र है /

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स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं.
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