Saturday, October 29, 2011

मानेगा सागर अंधेरों का हार

मस्त सम्माननीय स्नेही मित्रों को सादर नमस्कार और शुभकामनाएं... अभी दीपावली में मित्रों को मेसेज  भेजने के लिए चार पंक्तियों का सन्देश बनाया... नन्हें आयाम (बेटे) ने पढ़ा तो कहने लगा इसमें और पंक्तियाँ जोड़कर गीत बनाईये... बना कर सुनाया तो उसे बेहद पसंद आया.... आज आयाम के साथ दुनिया भर के तमाम नन्हें मुन्नों, बेटे/बेटियों को यह प्यारा सा गीत दीपावली के तोहफे के रूप में समर्पित है....


रोशनी की कश्ती में होकर सवार 
आया है दीपों का झिलमिल त्यौहार 
कितना भी गहरा हो तय है मगर 
हारेगा सत से सदा अन्धकार.

तारों की लड़ियों से जगमग हो घर
अम्बर से आयें ये सारे उतर
रोशन हों राहें हो क़दमों में फूल
मुस्काएं नैना तेरे उम्र भर
आनंद हिलोरें लें दिल में अपार
हारेगा सत से सदा अन्धकार...

जीवन में उलझन जो आये अगर
मायूस होना ना तू रत्ती भर
भागेंगे दुःख गीदड़ों की तरह
जाएगा जब सीना तू तानकर
सिंह की तरह रखना अपना व्यौहार
हारेगा सत से सदा अन्धकार...

फूलों के जैसे ही सुन्दर है तू
आशाओं का इक समंदर है तू
मुस्कानें तेरी दें दिल को सुकूं
बहता ज्यों इक दरिया अन्दर है तू
बहता चला चल तू लेकर बहार
हारेगा सत से सदा अन्धकार....

विश्वास दिल में ले बढना तुझे
अपना ही कल उज्जवल गढ़ना तुझे
जाना तुझे है बड़ी दूर तक
फैला ले पर अपने उड़ना तुझे
सपने तू अपने कर सारे साकार
हारेगा सत से सदा अन्धकार...

रोशनी की कश्ती में होकर सवार
आया है दीपों का झिलमिल त्यौहार
कितना भी गहरा हो तय है मगर
हारेगा सत से सदा अन्धकार.

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दीपों का  यह रोशन त्यौहार जीवन पथ पर सदा के लिए 
स्थाईत्व पा ले, इन्हीं शुभकामनाओं के साथ...
शुभ दीपावली
*************************************************
इस गीत को स्वरबद्ध करने का प्रयास... सुनें...

39 comments:

  1. bahut khoob sanjay bhai.aapki aavaaz bhi bahut achchee hai

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  2. रोशनी की कश्ती में होकर सवार
    आया है दीपों का झिलमिल त्यौहार
    कितना भी गहरा हो तय है मगर
    हारेगा सत से सदा अन्धकार.

    सकारातमक सोंच होनी ही चाहिए !!

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  3. हारेगा सत से सदा अन्धकार...
    सुन्दर!

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  4. बहुत सुन्दर गीत ..आयाम को आभार ..जिसकी वजह से सुन्दर गीत रचा गया .

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  5. कितना भी गहरा हो तय है मगर
    हारेगा सत से सदा अन्धकार.

    आमीन ......
    विश्वास दिलाती पंक्तियाँ ....

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  6. वाह बहुत खूब ....दिल से लिखी गई हर पंक्ति

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  7. जीवन में उलझन जो आये अगर
    मायूस होना ना तू रत्ती भर
    भागेंगे दुःख गीदड़ों की तरह
    जाएगा जब सीना तू तानकर
    सिंह की तरह रखना अपना व्यौहार
    हारेगा सत से सदा अन्धकार...bahut badhiyaa

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  8. अंधियारा दूर हटाने को
    प्रकाश फैलाने को
    आपका यह गीत
    उत्तम अगा

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  9. रोशनी की कश्ती में होकर सवार
    आया है दीपों का झिलमिल त्यौहार
    कितना भी गहरा हो तय है मगर
    हारेगा सत से सदा अन्धकार...

    Bahut Sunder...Shubhkamnayen...

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  10. गीत बहुत सुन्दर बन पड़ी है.. शुभकामना..

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  11. सुन्दर एहसासात सकारात्मक भाव और राग का गीत .मनोहर आनंद वर्षण करता हुआ नव जीवन भरता हुआ .आभार आपका इस सुन्दर प्रस्तुति को सांझा करने के लिए .ब्लॉग पर दस्तक के लिए .

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  12. कितना भी गहरा हो तय है मगर
    हारेगा सत से सदा अन्धकार Bahut khoob.

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  13. रोशनी की कश्ती में होकर सवार
    आया है दीपों का झिलमिल त्यौहार
    कितना भी गहरा हो तय है मगर
    हारेगा सत से सदा अन्धकार.

    ...बहुत सच कहा है...बहुत सुन्दर और प्रेरक अभिव्यक्ति..

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  14. सत से हारा है नित तम
    गीत गढ दिया है सुंदरतम

    शुभकामनाएं

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  15. कितना भी गहरा हो तय है मगर
    हारेगा सत से सदा अन्धकार.
    बहुत सुन्दर.

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  16. बहुत प्रेरक और सुन्दर कविता भाई संजय जी

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  17. बहता चला चल तू लेकर बहार
    हारेगा सत से सदा अन्धकार.....
    प्रेरक विचार ...सुन्दर रचना

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  18. सबसे पहले हमारे ब्लॉग 'जज्बात....दिल से दिल तक' पर आपकी टिप्पणी का तहेदिल से शुक्रिया.........आज पहली बार आपके ब्लॉग पर आना हुआ...........पहली ही पोस्ट दिल को छू गयी.......कितने खुबसूरत जज्बात डाल दिए हैं आपने..........बहुत खूब...........आज ही आपको फॉलो कर रहा हूँ ताकि आगे भी साथ बना रहे|

    कभी फुर्सत में हमारे ब्लॉग पर भी आयिए- (अरे हाँ भई, सन्डे को भी)

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    एक गुज़ारिश है ...... अगर आपको कोई ब्लॉग पसंद आया हो तो कृपया उसे फॉलो करके उत्साह बढ़ाये|

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  19. हर पँक्ति मन को छूती .... वाह बहुत सुन्दर...

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  20. आपकी ये कश्ती घर घर में पहुंचे ये ही कामना करुँगी शुभ दीपावली

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  21. कितना भी गहरा हो तय है मगर
    हारेगा सत से सदा अन्धकार.
    यह हुई ना बात बहुत अच्छे बधाई तो लेनी ही पड़ेगी

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  22. रोशनी की कश्ती में होकर सवार
    आया है दीपों का झिलमिल त्यौहार
    कितना भी गहरा हो तय है मगर
    हारेगा सत से सदा अन्धकार.

    बहुत सुन्दर पंक्तियाँ हैं संजय जी ! सकारात्मक ऊर्जा को प्रचारित प्रसारित करती बहुत ही प्रेरक रचना है ! बेटे आयाम की पसंद लाजवाब है ! शुभकामनायें व बधाई दीपावली की !

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  23. विश्वास दिल में ले बढना तुझे
    अपना ही कल उज्जवल गढ़ना तुझे
    जाना तुझे है बड़ी दूर तक
    फैला ले पर अपने उड़ना तुझे
    सपने तू अपने कर सारे साकार
    हारेगा सत से सदा अन्धकार...

    bahut sundar....

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  24. मधुर गीत और मधुर आवाज़ ... मजा आ गया ...

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  25. बहुत ही सुन्दर..हर पंक्ति में बच्चों के लिए प्रेरणादायक संदेश|

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  26. बहुत ही सुंदर आशा है नन्हा आयाम भी बड़े होकर आप ही की तरह हिंदी जगत को उजियारा कर देगा। दीपावली और साथ ही पड़ने वाले ढेर सारे उत्सवों की आपको शुभकामनायें और नव वर्ष रचनामयी होने की भी

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  27. कितना भी गहरा हो तय है मगर
    हारेगा सत से सदा अन्धकार.

    ये चिरंतन सत्य है और दीपावली यही याद दिलाने हाती है हर साल ।
    बहुत सुंदर कविता ।

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  28. बहुत सुन्दर रचना!
    सच में हारेगा अन्धकार... बस हमें दीप जलाए रखना है|

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  29. मधुर आवाज में मधुर गीत देता मधुर सन्देश !
    आभार और शुभकामनाएँ!

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  30. संजय भाई पहली दफा आपके ब्लॉग पर आया हूँ.
    आपकी सुन्दर प्रस्तुति पढकर और आपका मधुर
    गायन सुनकर अभिभूत हूँ.

    बहुत बहुत शुभकामनाएँ और आभार.

    मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है.

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  31. आपकी रचना पढ़ा काफी उत्कृष्ट लिखा है आपने
    बधाई हो !
    मेरे बलोंग पे आपका स्वागत है !

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  32. कितना भी गहरा हो तय है मगर
    हारेगा सत से सदा अन्धकार.


    विशवास और प्रेरेना का संचार करती हुईं
    बहुत खूबसूरत पंक्तियाँ ....

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  33. बहुत बढिया! गीत और स्वर, दोनों ही मधुर!

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  34. वाह बहुत सुन्दर...

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  35. फूलों के जैसे ही सुन्दर है तू
    आशाओं का इक समंदर है तू
    मुस्कानें तेरी दें दिल को सुकूं
    बहता ज्यों इक दरिया अन्दर है तू
    बहता चला चल तू लेकर बहार

    शुभकामनाओं से संयुक्त भावों को शब्द प्रदान करता सुंदर और प्रेरक गीत।

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  36. बहुत ही सुन्दर गीत है ..
    और आपकी आवाज भी बहुत अच्छी है.

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मेरी हौसला-अफजाई करने का बहुत शुक्रिया.... आपकी बेशकीमती रायें मुझे मेरी कमजोरियों से वाकिफ करा, मुझे उनसे दूर ले जाने का जरिया बने, इन्हीं तमन्नाओं के साथ..... आपका हबीब.

"अपनी भाषा, हिंदी भाषा" (हिंदी में लिखें)

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