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"अपनी भाषा, हिंदी भाषा" (हिंदी में लिखें)
एक नज़र इधर भी...
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समस्त सम्माननीय मित्रों को स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक बधाईयों सहित एक नज़्म सादर समर्पित.. . झुक नहीं सकता कभी भी मान यह अभिमान है। ...
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सभी सम्माननीय सुधि मित्रों को सादर नमस्कार कर एक ग़ज़ल महफिले दानां में पेशे खिदमत है... *************************************** बहर :- बहर...
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जाने क्या था उन उंगलियों की हरकत में... कि जमीन का सीना फाड़कर सैकड़ों बिजलियाँ मानों एक साथ आसमान की ओर लपकीं... सिमटते धूप क...
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स मस्त स्नेही मित्रों को सादर अभिवादन. कुछ समय से जिस अत्यधिक व्यस्तता के चलते आप सभी स्नेहीजनों से अवांछित दूरी बनी रही उसका पटाक्षेप मं...
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कुण्डलिया (१) काली रातों में खिले, दीपक बन के फूल उजियारे रत खोज में, अंधियारे का मूल अंधियारे का मूल, कहाँ स्थित जीवन में आओ हम तुम बैठ,...
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जंगल जंगल वेदना, मनुज वेदना शुन्य| भटके भूले राह सब, कहाँ पाप कंह पुण्य|| नादानी है छीनना, हरियाली के प्राण| वरदाता सब पेड अब, मांगें जीवनद...
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आओ सब बच्चे हो जायें | मनभावन सच्चे हो जायें || बचपन में खुद ही चल दें या | बचपन को ही पास बुलायें || बचपन यानि... मस्ती, मौज, शरारत... बिं...
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समस्त सम्माननीय सुधि स्वजनों को नूतन वर्ष की सादर बधाईयाँ..... ************************** घट आया घट काल का, घटक गये सब रीत |. स्वागत और व...
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समस्त सुधि मित्रों को सादर नमस्कार। आज बचपन में पढ़ी एक कहानी मेरे हाथ आ गयी.... शेर का फंदे में फसना, चूहे का जाल कुतरना... बड़ी शिक्षाप्रद ...
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(१) सुबह सुबह कँवल की पांखुरी पर थिरकती... शबनम की वह बूँद कितनी खुश... कितनी प्यारी लग रही है.... उसे कहाँ पता है.. अभी कुछ ही देर में ...

filhaal door door tak sirf aatank hai...
ReplyDeleteमुरख बैईठे गद्दी, साधु चले किनार
ReplyDeleteसती हां भूख मरे,लड़ुवा खाए छिनार
क्या कहें भाई कैसे मूर्ख है जो ऐसा काम करते हैं और वो लोग कैसे महामूर्ख हैं जो इन्हे ऐसा करने से जन्नत मिलेगी की शिक्षा देते हैं ।
ReplyDeleteआतंक के साये में ...।
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