Saturday, October 16, 2010

"रावण-रहित हो हर ह्रदय"

मस्त सुधि मित्रों को सादर नमस्कार। आप सभी प्रियजनों को असत्य, अधर्म, अन्धकार, स्वार्थ पर सत्य, धर्म और उजाले की विजय का महोत्सव "विजयादशमी" की हार्दिक, हार्दिक बधाईयाँ देते हुए एक प्यारी सी, नई रचना "रावण-रहित हो हर ह्रदय", इस कामना के साथ प्रस्तुत है कि आज के दिन स्थान स्थान पर प्रज्ज्वलित रावण के पुतलों के साथ दुनिया की तमाम बुराइयां जल कर भस्म हो जाय, और साथ ही उसके पुनरान्कुरण की समस्त संभावनाएं भी भस्म हो जाए....
हर्षित गगन, हर्षित धरा,
सन्देश यह खुशियों भरा,
सद्जीत का संगीत ले-
फिर आ गया लो दशहरा।
*
सन्दर्भ है अच्छाई का,
संकेत है रघुराई का,
निश्चित विजय, निर्मित विजय,
तय है सदा सच्चाई का ।
कण कण में उद्धृत सत्य यह
संकट से फिर क्यूँ मन डरा... ।
*
सम्बन्ध हो सम्मान का,
सौहार्द्रता की गान का,
संकल्प लें सदराह का-
सद्चेतना, सद्ज्ञान का
चिरमुक्त हो अब द्वेष से,
तन-मन-ह्रदय हो सुर भरा... ।
*
शक्ति जब अभिमान हो,
जब 'ज्ञान' ही 'अज्ञान' हो,
निष्फल हैं उद्दयम फिर सभी,
फिर चाहे जो बलवान हो।
सत से हुआ जब वह विमुख,
बलहीन हो रावण मरा... ।
*
हर्षित गगन, हर्षित धरा,
सन्देश यह खुशियों भरा,
सद्जीत का संगीत ले-
फिर आ गया लो दशहरा।
*
***** विजयोत्सव की शुभकामनाएं *****

Thursday, October 14, 2010

"चूहा और शेर"

समस्त सुधि मित्रों को सादर नमस्कार। आज बचपन में पढ़ी एक कहानी मेरे हाथ आ गयी.... शेर का फंदे में फसना, चूहे का जाल कुतरना... बड़ी शिक्षाप्रद कथा है। आज के परिवेश में उस कथा को परखने और विचारने का प्रयास किया तो एक सांकेतिक व्यंग्य रचना बन पडी। प्रस्तुत है -
"चूहा और शेर"

शेर के
शक्तिशाली पंजे में दबे
चूहे ने मिन्नत की-
"हुजुर, माईबाप,
मुझे छोड़ दें
मैं आपके काम आउंगा,
वक़्त आने पर
पिछली बार की तरह
जाल कुतर कर
आपको आज़ाद कराऊंगा..."

शेर ने पंजे का
दबाव बढ़ाया,
चूहे की कराह पर
कुटिलतापूर्वक मुस्कराया
बोला- "नादान चूहे,
मैंने उस समस्या को ही
ख़त्म कर दिया है,
शेरनी के नाम पर
जाल बनाने वाली कंपनी का
फिफ्टी परसेंट शेयर
खरीद लिया है...
अब तो बस हम
उन्हें जाल बिछाने की
जगह बताएँगे
जितने फसेंगे उसका आधा
वे ले जायेंगे, और
आधा मैं और शेरनी
आराम से खायेंगे।

चूहे, तुम्हें छोड़ दिया तो तुम
अपनी हरक़त से बाज नहीं आओगे,
जाल कुतरोगे
और हमें नुकसान पहुँचाओगे।
इसलिए बहुत जरुरी है,
तुम्हें खाना
मेरी मजबूरी है..."

कहता हुआ शेर
चूहे को पान की तरह चबा गया,
उसके चहरे पर
निश्चिंतता का भाव आ गया।

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"अपनी भाषा, हिंदी भाषा" (हिंदी में लिखें)

एक नज़र इधर भी...