Subscribe to:
Post Comments (Atom)
"अपनी भाषा, हिंदी भाषा" (हिंदी में लिखें)
एक नज़र इधर भी...
-
स मस्त सम्माननीय सुधि मित्रों को सादर नमस्कार... पिछले पंद्रह दिनों से अत्यधिक व्यस्तता ने ब्लॉग पठन - पाठन से दूर कर रखा था. अब जल्द ही नि...
-
चाँद शरमाता हुआ सा छुप गया | ले गया दिल और जां ले, उफ़! गया || धडकनों में गीत मीठे बज उठे, बांसुरी ले आसमां ही झुक गया || वो घटाएं, वो सम...
-
समस्त सम्माननीय मित्रों को स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक बधाईयों सहित एक नज़्म सादर समर्पित.. . झुक नहीं सकता कभी भी मान यह अभिमान है। ...
-
दिल तोड़ चले जाने वाले, दिल सूना सा है बिन तेरे. दिल में बसते हो तुम ही तुम, दिल में क्यूँ फिर गम के डेरे. दिल याद करे फ़रियाद करे, दिल भूल...
-
सभी सम्माननीय सुधि मित्रों को सादर नमस्कार कर एक ग़ज़ल महफिले दानां में पेशे खिदमत है... *************************************** बहर :- बहर...
-
प्यारी बहना रूठती, भाइ करत मनुहार. भाइ भगिन का प्यार है, भगवत का उपहार. स मस्त सम्मानीय स्नेही मित्रों को भाई बहिन के पवित्र प्यार से सराब...
-
सभी सम्माननीय स्नेही स्वजनों को सादर नमन. आदरणीय मित्रों आप सब की सहृदय संवेदनाओं ने कठिन समय में बड़ा संबल प्रदान किया. आप सभी को मैं ह्रदय ...
-
(१) सुबह सुबह कँवल की पांखुरी पर थिरकती... शबनम की वह बूँद कितनी खुश... कितनी प्यारी लग रही है.... उसे कहाँ पता है.. अभी कुछ ही देर में ...
-
मैं सहर की शाम की हर पीर लिखता हूँ जिंदगी में हर कदम तज्वीर लिखता हूँ |१| काट कर जड़ जंगलों की बादलों की मैं , इस धरा की सूखती तकदीर लिख...
-
कै से कैसे दुष्कृत्य कर जाते हैं हम.... सुबहा होने लगता है कि हम इंसान हैं.... आफरीन को जानकार कुछ दिन पूर्व मेरी पोस्ट बेटियाँ की क्षणिका...

filhaal door door tak sirf aatank hai...
ReplyDeleteमुरख बैईठे गद्दी, साधु चले किनार
ReplyDeleteसती हां भूख मरे,लड़ुवा खाए छिनार
क्या कहें भाई कैसे मूर्ख है जो ऐसा काम करते हैं और वो लोग कैसे महामूर्ख हैं जो इन्हे ऐसा करने से जन्नत मिलेगी की शिक्षा देते हैं ।
ReplyDeleteआतंक के साये में ...।
ReplyDelete