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"अपनी भाषा, हिंदी भाषा" (हिंदी में लिखें)
एक नज़र इधर भी...
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सादगी से जहाँ में निभाये चलो। आन भी हौसला भी बचाये चलो। इंदिया जिन्दगी का यही एक है , इश्क की पाक लौ को जलाये चलो। आलमे आरिजी क्या गमो...
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प्यारी बहना रूठती, भाइ करत मनुहार. भाइ भगिन का प्यार है, भगवत का उपहार. स मस्त सम्मानीय स्नेही मित्रों को भाई बहिन के पवित्र प्यार से सराब...
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सभी सम्माननीय सुधि मित्रों को सादर नमस्कार कर एक ग़ज़ल महफिले दानां में पेशे खिदमत है... *************************************** बहर :- बहर...
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चाँद शरमाता हुआ सा छुप गया | ले गया दिल और जां ले, उफ़! गया || धडकनों में गीत मीठे बज उठे, बांसुरी ले आसमां ही झुक गया || वो घटाएं, वो सम...
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दिल तोड़ चले जाने वाले, दिल सूना सा है बिन तेरे. दिल में बसते हो तुम ही तुम, दिल में क्यूँ फिर गम के डेरे. दिल याद करे फ़रियाद करे, दिल भूल...
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समस्त सम्माननीय मित्रों को सादर नमन सहित आज प्रस्तुत है ओपन बुक्स आनलाईन महा उत्सव अंक १५ के लिए तलाश विषय रचित दोहे.... आँखें अपनी...
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(१) सुबह सुबह कँवल की पांखुरी पर थिरकती... शबनम की वह बूँद कितनी खुश... कितनी प्यारी लग रही है.... उसे कहाँ पता है.. अभी कुछ ही देर में ...
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स मस्त सम्माननीय सुधि मित्रों को सादर नमस्कार... पिछले पंद्रह दिनों से अत्यधिक व्यस्तता ने ब्लॉग पठन - पाठन से दूर कर रखा था. अब जल्द ही नि...
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ख्वाब देखा जो पल में बिखर जाएगा। छोड़ कर अपना घर तू किधर जाएगा।1। बोल कर मीठी बोली बुला उसको तू, साया बन राहों में वो उतर जाएगा।2। इम्...
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मैं सहर की शाम की हर पीर लिखता हूँ जिंदगी में हर कदम तज्वीर लिखता हूँ |१| काट कर जड़ जंगलों की बादलों की मैं , इस धरा की सूखती तकदीर लिख...

filhaal door door tak sirf aatank hai...
ReplyDeleteमुरख बैईठे गद्दी, साधु चले किनार
ReplyDeleteसती हां भूख मरे,लड़ुवा खाए छिनार
क्या कहें भाई कैसे मूर्ख है जो ऐसा काम करते हैं और वो लोग कैसे महामूर्ख हैं जो इन्हे ऐसा करने से जन्नत मिलेगी की शिक्षा देते हैं ।
ReplyDeleteआतंक के साये में ...।
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