Showing posts with label माँ. Show all posts
Showing posts with label माँ. Show all posts

Sunday, April 29, 2012

मां

*
समस्त उजाले समेट कर
सूरज सरक गया 
क्षितिज के पार...

शेष है
सूर्योदय का अंतहीन इन्तजार....

*
सूखती नदियों 
और तुम्हारी किस्मत में 
फर्क ही कहाँ है...?

रे आंसुओं ! 
सागर से होड़ लेना 
तुम्हारे बस में कहाँ...

*
सितारों में 
इतनी रोशनी कहाँ 
कि तलाश सकें वे 
खुद की राहें.....

मेरे ईश्वर !
जाने किस गलतफहमी में 
तूने चाँद बुझा दिया.... 
*
काश! १६ अप्रेल की वह दहकती शाम न आई होती... आफिस से लौट कर कुछ जरुरी पेंडिंग रिपोर्ट तैयार कर रहा था कि सविता (श्रीमती) ने आकर बताया माँ को अच्छा नहीं लग रहा... "उन्हें बीपी की दवा दी थी कि नहीं....?" सुनिश्चित करता माँ के पास पहुंचा... उन्हें बेचैनी हो रही थी... "माँ बस ५ मिनट में हम हास्पिटल पहुँच रहे हैं" घर से मेडिकल कालेज हास्पिटल की दूरी सिर्फ ५ मिनट की है... लेकिन इन ५ मिनटों ने मुखर से मौन तक की यात्रा के समस्त पडाव तय कर दिए... सचमुच! इंसान विधि के सम्मुख कितना असहाय है.... कलीग्स के हाथों को कंधे पर महसूस कर देखा भाई, भाभी और श्रीमती "ट्राली" के पास सजल नयन आवाक खड़े थे... शाम बिलखती हुई माँ के पार्थिव शरीर से लिपटी रो रही थी... सूरज डूब गया था... फिर कभी उदित न होने के लिए....

माँ पञ्च तत्वों में समाहित हो कर सर्वव्यापी हो गईं... वे दिखाई नहीं देतीं... पर साँसों के साथ आती जाती हैं... धड़कनों में सुनाई देती हैं.... ईश्वर से यही प्रार्थना है कि वे मेरी अंतिम सांस तक धडकनों में यूँ ही सुनाई देती रहे... राह सुझाती रहें... ||ॐ||

इस विकट समय में आप सभी सम्मानीय ब्लॉगर और फेसबुक मित्रों की सहृदय संवेदनाओं ने परिवार को बड़ा संबल प्रदान किया... आप सभी स्नेही स्वजनों को सादर नमन करते अलौकिक माँ के श्री चरणों में हृदयान्जली समर्पित है...

माँ! छाँव ममता की रहे अक्षुण सदा, है कामना |
सूरज चमकता ही रहे, यादों की आये शाम ना ||
यूँ तो चला उन राहों में, तुमने दिखाए जो सदा,
फिर भी अगर पग डगमगाए, दे सहारा थामना ||

*******************||ॐ||*********************

 

"अपनी भाषा, हिंदी भाषा" (हिंदी में लिखें)

एक नज़र इधर भी...