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"अपनी भाषा, हिंदी भाषा" (हिंदी में लिखें)
एक नज़र इधर भी...
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सादगी से जहाँ में निभाये चलो। आन भी हौसला भी बचाये चलो। इंदिया जिन्दगी का यही एक है , इश्क की पाक लौ को जलाये चलो। आलमे आरिजी क्या गमो...
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मैं सहर की शाम की हर पीर लिखता हूँ जिंदगी में हर कदम तज्वीर लिखता हूँ |१| काट कर जड़ जंगलों की बादलों की मैं , इस धरा की सूखती तकदीर लिख...
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समस्त सम्माननीय मित्रों को सादर नमन सहित आज प्रस्तुत है ओपन बुक्स आनलाईन महा उत्सव अंक १५ के लिए तलाश विषय रचित दोहे.... आँखें अपनी...
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आओ सब बच्चे हो जायें | मनभावन सच्चे हो जायें || बचपन में खुद ही चल दें या | बचपन को ही पास बुलायें || बचपन यानि... मस्ती, मौज, शरारत... बिं...
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चाँद शरमाता हुआ सा छुप गया | ले गया दिल और जां ले, उफ़! गया || धडकनों में गीत मीठे बज उठे, बांसुरी ले आसमां ही झुक गया || वो घटाएं, वो सम...
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खुशी गु लाब की पांखुरी को छूते ही खामोशी से उतर आई मेरी तर्जनी की नाख़ून पर मुस्कुराती हुई ओस की एक बूँद..... अभी, मेरी नाडियों का स्पंदन म...
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दिल तोड़ चले जाने वाले, दिल सूना सा है बिन तेरे. दिल में बसते हो तुम ही तुम, दिल में क्यूँ फिर गम के डेरे. दिल याद करे फ़रियाद करे, दिल भूल...
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समस्त सम्माननीय मित्रों को स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक बधाईयों सहित एक नज़्म सादर समर्पित.. . झुक नहीं सकता कभी भी मान यह अभिमान है। ...
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प्यारी बहना रूठती, भाइ करत मनुहार. भाइ भगिन का प्यार है, भगवत का उपहार. स मस्त सम्मानीय स्नेही मित्रों को भाई बहिन के पवित्र प्यार से सराब...
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राह काँटों से भरी हो , या उमड़ती सी सरी हो, जीत की चाहत खरी हो, काल सिर नत हो झुकाये। बढ़...

filhaal door door tak sirf aatank hai...
ReplyDeleteमुरख बैईठे गद्दी, साधु चले किनार
ReplyDeleteसती हां भूख मरे,लड़ुवा खाए छिनार
क्या कहें भाई कैसे मूर्ख है जो ऐसा काम करते हैं और वो लोग कैसे महामूर्ख हैं जो इन्हे ऐसा करने से जन्नत मिलेगी की शिक्षा देते हैं ।
ReplyDeleteआतंक के साये में ...।
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