ख्वाब देखा जो पल में बिखर जाएगा।
छोड़ कर अपना घर तू किधर जाएगा।1।
बोल कर मीठी बोली बुला उसको तू,
साया बन राहों में वो उतर जाएगा।2।
इम्तहां रोजो शब जिंदगी लेती है,
आग में बन तू कुन्दन संवर जाएगा।3।
बात दिल में जो है दिल में ही रहने दे,
वक्त खुद सारी उलझन कुतर जाएगा।4।
दो घड़ी होती रौशन शमा तारीकी,
सुब्ह होते अन्धेरा गुजर जाएगा।5।
अक्स आईने में जो कभी देखा तो,
आदमी अपनी सूरत से डर जाएगा।6।
मुद्दते गुजरीं खो कर 'हबीब' आफियत,
ले के खुशियाँ तू कब अपने दर जाएगा।7।
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शब्दार्थ : रोजो शब = दिन रात | शामअ तारीकी = अंधेरों का चराग | आफियत = सुकून
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शब्दार्थ नहीं दे पाने की भूल हेतु सम्माननीय मित्रवृन्द से क्षमायाचना सहित...
सादर.