(१)
सुबह सुबह
कँवल की पांखुरी पर
थिरकती...
शबनम की वह बूँद
कितनी खुश...
कितनी प्यारी
लग रही है....
उसे कहाँ पता है..
अभी कुछ ही देर में
सूरज की किरने आयेंगी....!!!
![]() |
| Photo Taken from google & Edited |
(२)
दो परिचित से हांथों ने
आगे बढ़कर
खिल कर महकने को आतुर
रजनीगंधा के पौधे को,.
उखाड लिया जड़ से....
और डाल दिया
लेजाकर बाहर कूड़ेदान में...
बिलखती धरती का हाथ
हाथों में लिए सिसकता रहा
देर तक पूनम का चाँद.....!!!
****************************************************
||लें बेटियों को बचाने का संकल्प; तभी होगा सृष्टि का कायाकल्प||
****************************************************
