चाँद शरमाता हुआ सा छुप गया |
ले गया दिल और जां ले, उफ़! गया ||
धडकनों में गीत मीठे बज उठे,
बांसुरी ले आसमां ही झुक गया ||
वो घटाएं, वो समंदर क्या कहें,
जुल्फ ओ तर चश्म में दिन बुझ गया ||
आँख से उनकी दो मोती जो गिरे,
तीर सा कुछ आ जिगर में चुभ गया ||
इक सितारा हूँ फलक में टूटता,
आस्ताना ही सनम का छुट गया ||
कब्र पे मेरी वो आकर रो दिये,
भीग मैं गुल की शकल ले उठ गया ||
शब् सहर ख़्वाबों के दुश्मन हैं 'हबीब',
जिन्दगी का हर खजाना लुट गया ||
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सादर
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