Saturday, January 7, 2012

ग़ज़ल (राहे हयात)

सादगी से जहाँ में निभाये चलो।
आन भी हौसला भी बचाये चलो।

इंदिया जिन्दगी का यही एक है,
इश्क की पाक लौ को जलाये चलो।

आलमे आरिजी क्या गमों के सिवा?
आलमे आरिजी को भुलाये चलो।

आप जो साथ हों हर घड़ी बज्म है,
जिंदगी को सुरों में सजाये चलो।

आप ही आसमाँ आप ही हो जमीं
आइदा आशियाँ पे बनाये चलो।

ओहदा है खुदा का जहाँ से जुदा,
आशिकी में उसी के बिताये चलो।

खार ही खार हों राह तो क्या हुआ?
ताकते खुद 'हबीब' आजमाये चलो।

***************************************************************
राहे हयात = जिन्दगी का पथ  |  इंदिया = उद्देश्य  |  आलमे आरिजी = मृत्युलोक  |  आइदा = अनुकम्पा  |  खार = कांटे (कठिनाई) |
****************************************************************

Wednesday, January 4, 2012

क्षणिकाएं


(1)

तुझे सोचा
तो उदासी घिर आई है
बादल बन कर,
स्मृतियों के कानन में
करवटें बदलने लगे हैं
मयूर... दर्द के...!!

(2)

वा का वह टुकड़ा
जो तुम्हारे गेसुओं के बीच
मुस्कुराता...
अठखेलियाँ करता था,
मेरी आँखों में
भाप बन कर बैठ गया है...
जानता हूँ, अभी यह
ठंडा होकर पिघलेगा...
भीतर उठेगी एक सुनामी....!!

(3)

तेरी यादों के बादल का
सिरहाना बना
सोया था...
रात विचरती रही
आसमान में, 
शायद मुझे साथ लिए हुए...

सुबह जागा
तो तर था चेहरा
शबनम की बूंदों से....

(4)

तेरे कहे शब्द
जुगनू बन कर बैठ जाते हैं
अक्सर
नीब पर कलम की...
लगता है
मानो खेल रहा हो
हाथों में मेरे, एक...
कस्तूरी मृग !!!

*********************

"अपनी भाषा, हिंदी भाषा" (हिंदी में लिखें)

एक नज़र इधर भी...