Saturday, November 12, 2011

"बहता बचपन"

आओ सब बच्चे हो जायें | मनभावन सच्चे हो जायें ||
बचपन में खुद ही चल दें या | बचपन को ही पास बुलायें ||

बचपन यानि... मस्ती, मौज, शरारत... बिंदास बचपन के इन बिंदास छंदों और मोहक संसमरणों के साथ नटखट बचपन की सैर करते हुए सभी सम्माननीय मित्रवृन्द को "बाल दिवस" की  बिंदास बधाईयाँ....

दो०  
बचपन चिनता मुक्त है, बचपन सुख कै धाम|
बचपन, अम्बर बादल जस, घुमडत रहि दिन-शाम|

चौ०  
बाल काल मन में बस जाही| जीवन सकल अटल सुख पाही||
खेलत संगि संग दिन रैना| कबहु न निकसि कटु मुख बैना||
राज पाट अउ राजा रानी| गुल्ली डंडा, इत उत पानी|
रात दादि से सुनउ कहानी| सूरज कब निकलै ना जानी||
धरि के बस्ता इसकुल भागा| खेलत पाइ ज्ञान कै धागा||
संझा किरकिट, बांटी, भौरा| आमा, जामा निम्बू, औंरा|

दो०  
अमराइ में जाई के, पत्थर केरी तोड़|
घर कुम्हार का राह में, सूखत मटकी फोड||
 
चौ०  
उपवन बीच कटे इतवारा| खेला, कूदा, जीता हारा|
दादाजी के चढ के कांधे| करतब ऐसे नट क्या साधे||
भाइ-भगिन सन झूमा झाँटी| एहि लड़कपन कै परिपाटी||
झूठ-मूठ के कबहु रिसावा| मातु-पितू का नेह कमावा||
जानत कंह का होई चिनता| सुख में बइठे सुख ही बिनता||
छुटपन जइसे गुड कै धानी| मिठ ही पाई मीठ बखानी||

दो०  
बाल काल की का कहें, भइया निश्छल बाट|
बाल काल को सुमिर सुमिर, जीवन सारा काट|| 
 
सवै०
बालपना सुख की गगरी भरि नौरस नित्छ्लकावत जाये|
सत्य समोहक साज सुहावन सुन्दर संग सुनावत आये|
नींद नकारत, नन्द नहावत, नाच नचावत, नेह निभाये|
मोहक अर्थ लिये कहिनी नित हांसि हंसावत राह चलाये|
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"अपनी भाषा, हिंदी भाषा" (हिंदी में लिखें)

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