Saturday, September 24, 2011

ग़ज़ल

edited - from google

धूप का तिनका तिनका जोड़.
चाँद की चादर बुनकर ओढ.

ताकत अपनी क्यूँ भुला है?
जाग के रुख दरिया का मोड़.

दाम अगर खुशिया मांगे तो, 
अम्बर खींच के तारे तोड़. 

मंजिल तुझे पुकार रही है,
भाग तू सबसे आगे दोड़.

गहरे पैठ मिले है मोती,
संग लहरों के कर ले होड़.

जीत राग के नगमें गा तू, 
रंजो गम की दुनिया छोड़. 

रत्न 'हबीब' छुपे सब मन में,
मान ले, मन की छाती कोड़.

***********************************

"अपनी भाषा, हिंदी भाषा" (हिंदी में लिखें)

एक नज़र इधर भी...