जिसकी जो मरजी है गाओ, लोकतंत्र है /
जनता तो है ढोल; बजाओ, लोकतंत्र है /
एवरेस्ट विजय को निकली है मंहगाई,
भूखे भज के सब सो जाओ, लोकतंत्र है /
टू जी, और सी डब्लू जी, है गुल्लक अपनी,
आमदनी को खूब बढाओ, लोकतंत्र है /
पांच सितारा होटल मानिन्द वहाँ व्यवस्था,
जाओ भाइ जेल हो आओ, लोकतंत्र है /
मुट्ठी में क़ैदी कानून, फिर चिंता कैसी,
बेटी-बहन की लाज उड़ाओ, लोकतंत्र है /
लहू की किस्मत ही बहना है, बह जाने दो,
हत्यारों के दिल बहलाओ, लोकतंत्र है /
मुर्गा एक टंगा तंदूर में, बड़ा लज़ीज़,
मुल्क समूचा भून के खाओ, लोकतंत्र है /
सुप्रीम-कोर्ट की ना सुनते वो, अपनी क्या,
लोकपाल के नगमें गाओ, लोकतंत्र है /
बीत गया है दिन स्वेद बहाते, स्वाद विहीन,
रोटी के अब ख्वाब सजाओ, लोकतंत्र है /
आड़े आते हैं जो भी काले कृत्यों के,
आधी रतिया जा निपटाओ, लोकतंत्र है /
जी.डी.पी. और ग्रोथ रेट की ग्राफ बना कर,
विश्व सहित खुद को बहलाओ, लोकतंत्र है /
फसलें बारूद की उगती जंगल-घाटी में,
नीरो बन; बांसुरी बजाओ, लोकतंत्र है /
सैतालिस के पहले, बाद में है अंतर क्या?
लब ‘हबीब’ के आ सी जाओ, लोकतंत्र है /
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स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं.
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