Sunday, July 17, 2011

जीवन संगीत-२

वक्त की पनाहों में, खुशियों की बाहों में
आँधियों के पहरे हैं, जिंदगी की राहों में
कश्ती को तूफां में, चलने-मचलने दो
शक्ति अक्षुण्य लिए, अपनी निगाहों में.
Photo by: Habib.

जीवन इक आशा है, चलना परिभाषा है
बाधाएं हर क़दम, बन खड़ी निराशा है
जीने की चाव लिए, बढ़ने की ताव लिए,
तेरा संकल्प हीकठिनाई में, दिलासा है
दहका ले ज्वाला इक, ह्रदय की उछाहों में

कश्ती को तूफां में, चलने-मचलने दो  
शक्ति अक्षुण्य लिए, अपनी निगाहों में....

लहरों का जोश लिए, सागर सा होश लिए
उठा कदम कराल तू, अम्बर आगोश लिए
पर्वत की छाती पर, छाप छोड़ पावों के
धरती पर गाथा गढ़, उत्कट उदघोष लिए
तेज देख देख तेरा, सूर्य छुपे छाहों में...

कश्ती को तूफां में, चलने-मचलने दो
शक्ति अक्षुण्य लिए, अपनी निगाहों मे....


Wednesday, July 13, 2011

"ओह! मुंबई..."

“आतंक के सलासिल ना टूटते हैं भाई
मुंबई के आसमां में फिर देख लाली छाई
होते धमाके फिर से, हैं आज दिल के भीतर
इक  आँख में नमी है, इक  आँख में रुलाई”
मुम्बई आज फिर 'सीरियल ब्लास्ट' से दहला है... दर्जन भर से ज्यादा निर्दोष भाई/बहन अकारण शहीद हुए हैं... 
हे इश्वर!! जाने कब ये सिलसिला  ख़त्म होगा... जाने कब ये सिरफिरे, आतंक के पुजारी  इंसान बनेंगे... जाने कब ये शैतान ज़िंदगी की कीमत समझेंगे... जाने कब...?? जाने कब...??

"अपनी भाषा, हिंदी भाषा" (हिंदी में लिखें)

एक नज़र इधर भी...