Saturday, May 7, 2011

"मां तुझसे दूर हम किधर जायेंगे...."

टुकड़ों में टूट कर

बिखर जायेंगे,

मां तुझसे दूर

हम अगर जायेंगे...

तेरे ही कदमों में

ज़न्नत है मां

ज़न्नत को छोड़ भला,

हम किधर जायेंगे....

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जो करें, जिधर चलें,

तेरी ही दुआ तले,

पथरीली राहों में

फूल ही बिछे मिलें,

हर कठिन घड़ी में

तू ही शक्ति है मां,

कठिनतम राहों से भी

हंस के गुजर जायेंगे...

ज़न्नत को छोड़ भला

हम किधर जायेंगे....

*

सुलगती सी माया में

तेरी ममता ही साया है,

मरुभूमी को इसने,

गुलशन बनाया है,

तेरी ही खुशबू है

भू से अम्बर तक मां,

भू से अम्बर तक हम

तेरे ही गुण गायेंगे...

ज़न्नत को छोड़ भला

हम किधर जायेंगे...

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********* मदर्स दे पर मातृशक्ति को सादर वंदन **********

Tuesday, May 3, 2011

"लादेन सुपुर्द-ए-आब"

अमेरिका ने आक्रान्ता को दीगर मुल्क में घुस कर मार गिराया...


हम हत्यारों को क़ैद कर के भी पाल रहे हैं... क्यों??


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जश्न है अमेरिका में, लादेन सुपुर्दे आब।
खौफ मचा कर हिंद में, ज़िंदा अफजल-कसाब॥

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बैठे, खाए ऐश में, जैसे हों दामाद।
रईयत को हक भी नहीं, करने की फ़रियाद॥

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अधिवक्ता मिल गए इन्हें, कैसे भाई जान ?
कौन इनके करमों से, बन बैठा अनजान ??
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इन्हें बचा कर हासिल क्या, होगा बड़ा सवाल ?
गद्दारों की पैरवी पर, मचता नहीं बवाल॥
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जाने कित्ता खींचेगा, केस नहीं है साफ़।

खुशकिस्मती शहीदों की, अगर मिला इन्साफ॥
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हिंद के हत्यारे, सज़ा न पायेंगे क्या रे?

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"अपनी भाषा, हिंदी भाषा" (हिंदी में लिखें)

एक नज़र इधर भी...