Friday, March 18, 2011

ब्लॉगर ललित शर्मा सम्हालेंगे 'डालफिन' की कमान

डालफिन स्कूल का संकट अब जल्द ही ख़त्म हो जाएगा। नंबर वन ब्लॉगर ललित शर्मा ने इसकी बागडोर अपने हाथ में लेना स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही स्कूल व छात्रों के भविष्य को लेकर उठने वाले प्रश्नचिह्न और असमंजस समाप्त हो गए।
*
ज्ञातव्य हो कि ललित शर्मा जी ने स्कूल और वहां पढ़ने वाले हजारों छात्रों के भविष्य के मद्देनजर पिछले दिनों स्कूल मेनेजमेंट से इसका संचालन अपने हाथों में लेने की इच्छा जाहिर की थी। इसी तारतम्य में कल स्कूल मेनेजमेंट की बठक आयोजित की गयी जिसमें पूर्व संचालक के अतिरिक्त समस्त सदस्य उपस्थित थे। बैठक में भवन मालिक, वाहन चालक तथा स्टाफ के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। भवन मालिक ने बकाया राशि का भुगतान कर दिए जाने कि स्थिति में मामले को कोर्ट में ना ले जाने का आश्वाशन दिया है। वाहन चालकों ने भी श्री शर्मा की समझाईश पर छात्रों के भविष्य को देखते हुए अपनी हड़ताल वापस ले ली है। उनके प्रतिनिधि ने चर्चा में बताया कि श्री ललित शर्मा के संचालक बनाने से सभी साथियों में खुशी का माहौल है। हमारे कई साथी उनके ब्लॉग के फालोवर हैं और लगातार उनका ब्लॉग पढ़ते रहते हैं। उन्होंने हमारा वेतन जल्द देने के साथ ही अपने ब्लॉग में अगली पोस्ट वाहन चालकों के ऊपर लिखने का वादा किया है।
*
स्कूल के प्राचार्य ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि श्री ललित शर्मा जी का स्कूल की बागडोर अपने हाथ में लेना वैसा ही है जैसे महावीर हनुमान का पर्वत उठाना। हमें विश्वास है कि उनके मृत संजीवन उपचार से यह स्कूल जल्द ही उनके ब्लॉग की तरह नंबर वन बन जाएगा। प्राचार्य के अनुसार स्कूल के साथ श्री शर्मा के जुड़ने से पालकों में भी संतोष है। उनके बीच थोड़ी सी चिंता शर्मा जी की कड़क मूंछो को लेकर है कि बच्चे उन्हें देखर भयभीत ना हो जाएँ। इसीलिए बैठक में उनसे विशेष आग्रह किया गया है कि वे अपनी मूंछे कटवाएं नहीं तो छटवा जरुर लें और अच्छी बात यह है कि उन्होंने इस आग्रह पर विचार करने का आश्वाशन दिया है।
*
बैठक से बाहर आते हुए श्री शर्मा काफी संतुष्ट और प्रसन्नचित दिखाई दिए। उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि मेनेजमेंट ने स्कूल संचालन के लिए निर्मित उनकी कार्य योजना के 'ब्लू प्रिंट' देखकर उन्हें सर्वसम्मति से स्कूल का नया मेनेजिंग डायरेक्टर स्वीकार किया है। पूर्व डायरेक्टर द्वारा आपत्ती किये जाने की संभावना को उन्होंने सिरे से ख़ारिज करते हुए कहा कि उन्हें बैठक की सुचना दी जा चुकी थी और हर प्रक्रिया संवैधानिक रूप से पूरी की गयी है।
*
उन्होंने बताया कि नए सत्र से पद्धती में कुछ क्रांतिकारी परिवर्तन किये जायेंगे। जैसे छटवीं कक्षा से प्रत्येक छात्र को इंटरनेट की जानकारी दी जायेगी। उन्हें ब्लॉग लेखन के महत्व और तकनिकी जानकारियाँ भी उपलब्ध कराई जायेंगी। इसके लिए प्रत्येक माह एक विशेष कार्यशाला स्कूल में आयोजित की जायेगी जिसमें देश के धुरंधर ब्लॉगर छात्रों को ब्लागिंग के महत्व समझायेंगे। उन्होंने कहा कि इसके लिए ब्लागर्स को किसी प्रकार का भुगतान नहीं किया जाएगा बल्कि साल में एक बार होली के दिन उनके लिए 'फुल ट्रीट' अरेंज किया जाएगा जहां हर बात की व्यवस्था रहेगी। उन्होंहे नाम सार्वजनिक करने से इनकार करते हुए कहा कि कुछ ब्लॉगर ने इस आफर पर उत्साह अवश्य दिखाया है लेकिन उनकी औपचारिक सहमती आनी बाकी है। प्रकिया पूरी होते ही पेनल का नाम जारी कर दिया जायेगा।

अभी इन तमाम डेवलपमेंट में ब्लॉग जगत कि प्रतिक्रया आनी बाकी है।
**************************************
नोट - सुना है होली की हवाओं ने मौसम को कुछ शरारती बना दिया है।
उँगलियों के नीचे की बोर्ड, और मुह में भंग की गोली है,
उल्टी सीधी बात लगे तो बुरा ना मानों होली है।
"समस्त सम्मानीय ब्लॉगर मित्रों को होली की रंग बिरंगी शुभकामनाये."
**************************************

Monday, March 14, 2011

"पानी ले आया ये कैसा शरर"

मस्त सुधि, स्नेही, सहृदय मित्रों को सादर नमस्कार। मित्रों, हमारे जापानी भाई/बहन आज गंभीर त्रासदी की चपेट में हैं... उगते सूरज का यह चितेरा देश आज गहरे अँधेरे में डूबा है....
"कितनी लम्बी रात है, इन्हें नहीं मालूम।
सूर्योदय का रास्ता, देख रहे मासूम॥
आईये, दो क्षण हाथ जोड़ कर सर्वशक्तिमान से दुआ करें कि वह हमारे असहाय भाई/बहनों को सहारा दे। विधाता से रहम की गुजारिश के साथ एक ग़ज़ल "पानी ले आया ये कैसा शरर" लाखों भाई बहनों को समर्पित है...
*
लहरों का गुस्सा, परमाणु ज़हर।
खुदाया! क्यूँ टूटा है तेरा कहर।
*
खुशियों की लाशें, अश्कों के कफ़न,
तस्वीरें दर्दनाक, जहां तक नज़र।
*
चला है उसके आगे किसका जोर,
जैसे है तिनका, करे क्या बशर।
*
दुआओं में उट्ठे हैं तमाम हाथ,
फरियादें होंठों पर, आँखे अहमर।
*
जाएँ कहाँ सारी दुनिया है यार,
उसकी ही चौखट, उसका ही दर।
*
करें उसके नाम अपने सारे करम,
'वो' ही 'हबीब' सबका सच्चा रहबर।
*
*****************************
शब्दार्थ: बशर = इंसान। अहमर = सुर्ख।
*****************************
"हे प्रभु! अपने संतानों पर रहम कर, कृपा दृष्टी बनाए रख।"

"अपनी भाषा, हिंदी भाषा" (हिंदी में लिखें)

एक नज़र इधर भी...