समस्त आत्मीय स्नेहीजनों को सादर अभिवादन। शताब्दी के दूसरे दशाब्दी का प्रथम वर्ष सृष्टी का चौखट लांघने ही वाला है। सर्वत्र उल्लास व हर्ष के मध्य सारे जहां की तरह आपका यह नादाँ हबीब भी यही कामना करता है कि नवागत वर्ष सारे जहां में अमन-ओ-चैन और सुख समृद्धी का विस्तार ले कर आये, तथा आप सभी गुनीजनों को ह्रदय से सादर, हार्दिक बधाईयाँ और शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए यह पोस्ट हमारी प्यारी, खुबसूरत दुनिया को समर्पित है.... "स्वागत-नवागत"*
नया साल, नया हाल।
स्वप्न बुने नया जाल॥
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रहे ना भीत
उर बसे प्रीत
गूंजे सर्वत्र खुशी के गीत
रचे हवा नया सुर ताल॥
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नई चाह,
नया राह
राह कोई रहे ना स्याह
सूर्य चले अब नया चाल॥
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समय गया,
देकर नया
रखें दिलों में कुछ दया
सबको हो सबका ख़याल॥
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हो बैर ख़त्म
आवेश ख़त्म
आपस के सब द्वेष ख़त्म
सबका बने ह्रदय विशाल॥
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नया साल, नया हाल।
स्वप्न बुने नया जाल॥
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हार्दिक शुभकामनाएं
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