Thursday, June 3, 2010

हिंद के बेटों उट्ठो के वन्दे मातरम गाना होगा


मई २०१०

आनंद मठ की परंपरा को फिर हमें अपनाना होगा।

हिंद के बेटों उट्ठो के वन्दे मातरम गाना होगा।


आततायी आज अपने ही बने हैं,

तेग भाई की ही भाई पर तने हैं,

एकता का सूत्र पुनः सिखलाना होगा।

हिंद के बेटों उट्ठो के वन्दे मातरम गाना होगा।


शासकों ने आँख अपनी फेर ली है,

सेना अपनी गीदड़ों ने घेर ली है,

बाघ की भाँती हमें लड़ जाना होगा।

हिंद के बेटों उट्ठो के वन्दे मातरम गाना होगा।


आज जीवन ही बड़े खतरे में है,

रक्षक हमारे खुद कड़े पहरे में है,

अपना बीड़ा स्वयं हमें उठाना होगा।

हिंद के बेटों उट्ठो के वन्दे मातरम गाना होगा।


उट्ठो, जागो की सागर मंथन की घडी है,

हिंद की चिंता यहाँ किसको पड़ी है,

महादेव बन गरल हमें पी जाना होगा।

हिंद के बेटों उट्ठो के वन्दे मातरम गाना होगा।


"अपनी भाषा, हिंदी भाषा" (हिंदी में लिखें)

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