Saturday, January 7, 2012

ग़ज़ल (राहे हयात)

सादगी से जहाँ में निभाये चलो।
आन भी हौसला भी बचाये चलो।

इंदिया जिन्दगी का यही एक है,
इश्क की पाक लौ को जलाये चलो।

आलमे आरिजी क्या गमों के सिवा?
आलमे आरिजी को भुलाये चलो।

आप जो साथ हों हर घड़ी बज्म है,
जिंदगी को सुरों में सजाये चलो।

आप ही आसमाँ आप ही हो जमीं
आइदा आशियाँ पे बनाये चलो।

ओहदा है खुदा का जहाँ से जुदा,
आशिकी में उसी के बिताये चलो।

खार ही खार हों राह तो क्या हुआ?
ताकते खुद 'हबीब' आजमाये चलो।

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राहे हयात = जिन्दगी का पथ  |  इंदिया = उद्देश्य  |  आलमे आरिजी = मृत्युलोक  |  आइदा = अनुकम्पा  |  खार = कांटे (कठिनाई) |
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"अपनी भाषा, हिंदी भाषा" (हिंदी में लिखें)

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