Thursday, November 4, 2010

"दीपावली के दोहे"

समस्त स्नेहीजनों, समादरनीय मित्रों को दीपोत्सव की सादर बधाइयां देते हुए, इस कामना के साथ कि, "माँ महालक्ष्मी सदैव अपने आशीष की वर्षा करती रहें, जगमग उजालों का यह त्यौहार जीवन में सदा के लिए स्थायित्व पा ले, " आपके बीच उपस्थित हूँ, दोहों के चंद दीप लेकर...

"दीपावली के दोहे"





तम भव-भर से दूर हो, आया काल विशेष।
तारे थप थप थाप दें, झूमे सारा देश॥


आज रात सूरज धरे, नन्हें-नन्हें रूप।
शीतल पवन महक उठे, झिलमिल बिखरे धुप॥


हर इक घर के आंगना, दीप नाचने आय।
उजियारा दोहे पढ़े, किरणें ढोल बजाय॥


शशी अमावस में चमके, सकल निशा आकाश।
कृष्ण, शुक्ल हो जात है, मन में हो विश्वाश॥


अभिनन्दन दीपक जले, रजनी महके फूल।
पथ विषाद का रोक लें, खुशियाँ बनकर शूल॥



किरण-किरण शायर बने, उजियारा हो गीत।
दीपशिखा नर्तन करे, रचे हवा संगीत॥


थाली आशा फूल लो, प्रक्षालन को नीर।
बढ़कर देखो द्वार में, खुशियाँ खडी अधीर॥


जीवन में दीपावली, निस दिन रहे 'हबीब' ।
सफलताएं राह बने, सूरज बने नसीब॥

*********शुभ-दीपावली**********


"अपनी भाषा, हिंदी भाषा" (हिंदी में लिखें)

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