सुधि मित्रों, सादर नमन,
"स्वराज मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा" का उद्घोष कर जन जन में उत्साह भर देने वाले अमर स्वतंत्रता संग्राम योद्धा लोकमान्य तिलक की पुन्य तिथि इस वर्ष मित्रता का पावन सन्देश साथ लाई है। सामाजिक समरसता, साम्प्रदायिक सद्भावना और स्वराज स्थापना के लिए जीवन पर्यंत समर्पित महामानव को श्रद्धा पूर्वक स्मरण करते हुए "सामजिक समरसता और सांप्रदायिक सद्भावना" का आधार - 'मित्रता' पर रचना पोस्ट कर आप सभी स्नेहीजनों को मित्रता दिवस क़ी हार्दिक बधाई प्रेषित करता हूँ...
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जीवन का विज्ञान है दोस्ती,
मस्जिद से उठी अजान है दोस्ती,
राग-द्वेष से दूर बच्चों की
निश्छल सी मुस्कान है दोस्ती।
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गीता और कुरान है दोस्ती,
सूर और रसखान है दोस्ती,
कबीर और बुल्हे की साखी
गिरजे का 'क्रास-महान' है दोस्ती।
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सृष्टी का आधार है दोस्ती,
सुख का सद्संचार है दोस्ती,
सुदामा संग कृष्ण की लीला,
प्रेम का पारावार है दोस्ती।
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सागर, नदिया, नाव है दोस्ती,
शीतल, ठंडी छाव है दोस्ती,
दुर्गम राहों में साथ निभाये
सुगढ़, सुदृढ़ दो पाँव है दोस्ती।
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आती जाती श्वांश है दोस्ती,
एक अटल विश्वास है दोस्ती,
रिश्तों के भ्रम जाल से ऊपर
अनंत खुला आकाश है दोस्ती।
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