Wednesday, December 14, 2011

अहसास

शहरे अलफाज का सौदागर, अहसासों के गुलशन में,
ले कर झोली भर गीत मधुर, बैठा है लब खामोश लिए ।

कुछ भीगे से, कुछ खिलते से, कुछ मुरझाते, कुछ सपनीले,
कुछ उलझे से, कुछ सुलझे से, कुछ ख्वाब हसीं आगोश लिए ।

कुछ यार मिले, गमख्वार मिले, कुछ इश्को सुकूं, कुछ शिकवे गिले,
कुछ मंजर वाबस्ता दिल में, कुछ खुशियाँ, कुछ अफसोस लिए ।

कुछ अपने हैं, कुछ अपनाए, कुछ पलते हैं बिन बतलाये,
कुछ रंज हमेशा मुस्काते, संग आते इक सा जोश लिए ।

कुछ यादें हैं, कुछ फरियादें, कुछ जाम विसाले माह के हैं,
कुछ ख्वाब लिए सरशार फलक, जागा है दिल मदहोश लिए।

कुछ चहके से, कुछ बहके से, यादों के जुगनू महके से,
कुछ गुल राहों में देख हबीब खिले नगमा-ए-नोश लिये।

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* मंजर = दृश्य | वाबस्तः = सम्बद्ध | सरशार = नशे में मत्त | विसाल = मिलन | नोश = अमृत 
*********************** 

33 comments:

  1. दिल खुश कर देने वाली रचना... बहौत बधाई..

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  2. कुछ यादें हैं, कुछ फरियादें, कुछ जाम विसाले माह के हैं,
    कुछ ख्वाब लिए सरशार फलक, जागा है दिल मदहोश लिए। bahut hi khaas ehsaas

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  3. बहुत उम्दा..........!!

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  4. मस्त रचना है, अब कूछ नव वर्ष के लिए हो जाए।

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  5. इतनी स्तरीय रचना पे कुछ कहने के काबिल नहीं हूँ... बस अच्छी लगी इसलिए वाह कहने को दिल बेताब हो गया जी...

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  6. सुन्दर प्रस्तुति पर हमारी बधाई ||

    terahsatrah.blogspot.com

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  7. खुबसूरत अल्फाजों में पिरोये जज़्बात....शानदार |

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  8. कुछ अपने हैं, कुछ अपनाए, कुछ पलते हैं बिन बतलाये,
    कुछ रंज हमेशा मुस्काते, संग आते इक सा जोश लिए ।

    बहुत उम्दा....

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  9. शहरे अलफाज का सौदागर, अहसासों के गुलशन में,
    ले कर झोली भर गीत मधुर, बैठा है लब खामोश लिए ।

    बहुत खूब एहसास, वाह !!!

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  10. संजय जी शब्दों को बड़े ही क़रीने से सजाते हैं आप। बधाई।

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  11. वाह .....बहुत खूब

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  12. फुर्सत के दो क्षण मिले, लो मन को बहलाय |

    घूमें चर्चा मंच पर, रविकर रहा बुलाय ||

    शुक्रवारीय चर्चा-मंच

    charchamanch.blogspot.com

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  13. वाह , बहुत खूबसूरत एहसास लिए हुए .. बेहतरीन गज़ल

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  14. बहुत खुबसूरत ग़ज़ल.....खुबसूरत अल्फाजो से सजी|

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  15. हर एक शेर उम्दा ...बेहतरीन गजल ..!

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  16. खुबसूरत ग़ज़ल बहुत पसंद आई....

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  17. कुछ शब्द सीखे इसी बहाने।

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  18. एहसासों का यह गुलशन अच्छा लगा ।

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  19. कुछ अपने हैं, कुछ अपनाए, कुछ पलते हैं बिन बतलाये,
    कुछ रंज हमेशा मुस्काते, संग आते इक सा जोश लिए ।

    ग़ज़ब का प्रयोग करते हैं। लगता है जैसे शब्दों से आप खेल रहे हों।
    जबर्दश्त पकड़ है इस विधा पर आपकी। आपकी कोई एक रचना हम आंच पर लेने की योजना बना रहे हैं। आपकी सहमति चाहिए।

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  20. बहुत सटीक और सार्थक प्रस्तुति।

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  21. bhaut khubsurat ehsaas aur alfaz.....

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  22. कुछ चहके से, कुछ बहके से, यादों के जुगनू महके से,
    कुछ गुल राहों में देख हबीब खिले नगमा-ए-नोश लिये।

    आपका लहजा ...अंदाज-ऐ-बयां कमाल का है हबीब साहब ...हर शेर जानदार !

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  23. खूबसूरत एहसास और खूबसूरती से सजे शब्द...
    सादर बधाई|

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  24. कुछ यादें हैं, कुछ फरियादें, कुछ जाम विसाले माह के हैं,
    कुछ ख्वाब लिए सरशार फलक, जागा है दिल मदहोश लिए।

    vah mishra ji badhai ho...

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  25. कुछ भीगे से, कुछ खिलते से, कुछ मुरझाते, कुछ सपनीले,
    कुछ उलझे से, कुछ सुलझे से, कुछ ख्वाब हसीं आगोश लिए

    bahut sundar.

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  26. कुछ अपने हैं, कुछ अपनाए, कुछ पलते हैं बिन बतलाये,
    कुछ रंज हमेशा मुस्काते, संग आते इक सा जोश लिए ।

    कुछ यादें हैं, कुछ फरियादें, कुछ जाम विसाले माह के हैं,
    कुछ ख्वाब लिए सरशार फलक, जागा है दिल मदहोश लिए।
    वाह ...बहुत खूब ।

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  27. अच्छी प्रस्तुति के लिए बधाई "कुछ भीगे से -------कुछ ख्याब
    हंसीं आगोश लिए "बेहतरीन पंक्तियाँ
    आशा

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  28. बेहद खुबसूरत ..

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  29. आपका पोस्ट पर आना बहुत ही अच्छा लगा मेरे नए पोस्ट "खुशवंत सिंह" पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

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  30. बेहतरीन...
    बहुत सुन्दर.
    बधाई.

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  31. कुछ यार मिले, गमख्वार मिले, कुछ इश्को सुकूं, कुछ शिकवे गिले,
    कुछ मंजर वाबस्ता दिल में, कुछ खुशियाँ, कुछ अफसोस लिए ।

    सुभान अल्लाह...बेहतरीन...दाद कबूलें.

    नीरज

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मेरी हौसला-अफजाई करने का बहुत शुक्रिया.... आपकी बेशकीमती रायें मुझे मेरी कमजोरियों से वाकिफ करा, मुझे उनसे दूर ले जाने का जरिया बने, इन्हीं तमन्नाओं के साथ..... आपका हबीब.

"अपनी भाषा, हिंदी भाषा" (हिंदी में लिखें)

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